चिन्यालीसौड़। शिवरात्रि के पर्व के साथ ही पुजार गांव स्थित भडेश्वर महादेव मंदिर में निसंतान दंपतियों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। मान्यता है कि भडेश्वर देवता की आराधना से संतान सुख मिलता है।
पुजारगांव बगोड़ी में भडेश्वर महादेव का पौराणिक मंदिर है। शिवरात्रि पर निसंतान दंपति भालेनाथ के दर्शनों को काफी संख्या में पहुंचते हैं। पुजारी सुरेशानंद भट्ट, मंदिर समिति के अध्यक्ष दीपक बिष्ट ने बताया कि भडेश्वर देवता की पूजा-अर्चना के बाद कई निसंतान दंपति को संतान सुख प्राप्त हुआ है। हडीयाणी निवासी पूर्ण सिंह ने बताया कि कुछ साल पहले उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए मंदिर में जलता दिया लेकर देवता की आराधना की थी, जिसके बाद उन्हें संतान सुख मिला है।
जीतू बगडवाल के पिता ने बनाया मंदिर
भडेश्वर देवता का मंदिर पहले दिचली थाती गांव में था। 1855 में भडेश्वर देवता बगोड़ी के वीर-भड़ जीतू बगडवाल के पिता गरीबा बगडवाल के स्वप्न में आए और बगोड़ी गांव में अपना मंदिर बनाने को कहा। इसके बाद उन्होंने देवता का मंदिर बनाया। मान्यता है कि 19वीं सदी में जीतू बगडवाल के छोटे भाई नानिया बगडवाल की संतान न होने पर उसकी पत्नी ने रातभर मंदिर में जागरण किया था, जिसके बाद उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ।
कौन हैं भडेश्वर देवता
लोक कथा के अनुसार भडेश्वर देवता को टिहरी के कोठियाडा केमर गांव का निवासी माना जाता है। सात भाइयों में से भडेश्वर तीसरे नंबर के थे। एक बार पत्थर की चपेट में आने से सातों भाइयों की मौत हो गई थी, जो बाद में देवता के रूप में टिहरी और उत्तरकाशी के विभिन्न क्षेत्रों में अवतरित हुए। इसमें ओणेश्वर देवल, थकलेश्वर भरपुरिया गांव, भडेश्वर बगोड़ी, बालेश्वर मणी, कोटेश्वर भरपुरिया गांव, भमासुर रैका और भेलेश्वर भेलुंता गांव में अवतरित हुए।