उत्तरकाशी। जनपद में मत्स्य पालन की संभावनाएं टटोलने व अभी तक इस दिशा में चल रही कार्रवाई का जायजा लेने केंद्रीय मत्स्यिकी विकास बोर्ड के वैज्ञानिकों की टीम उत्तरकाशी पहुंची। उन्होंने राजकीय मत्स्य प्रक्षेत्र गंगोरी के साथ ही सिंगोट गांव में ग्रामीणों द्वारा मत्स्य उत्पादन के लिए तैयार तालाबों का निरीक्षण किया।
रविवार को उत्तरकाशी पहुंचे केंद्रीय मत्स्यिकी विकास बोर्ड के वैज्ञानिकों ने गंगोरी स्थित मत्स्य प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान सहायक निदेशक मत्स्य प्रमोद शुक्ल ने महाशीर एवं असेला आदि मत्स्य बीजों के संचय की जानकारी दी। उन्होंने जनपद में ट्राउट मछली उत्पादन की संभावनाओं के बारे में बताया। बोर्ड के वैज्ञानिकों ने मछली की पंगेसिपस प्रजाति प्रयोग के तौर पर पनपाने की सलाह दी। इन वैज्ञानिकों ने नीली क्रांति योजना के तहत डुंडा प्रखंड के सिंगोट बरसाली में उम्मेद सिंह कलूड़ा एवं अन्य लाभार्थियों द्वारा तैयार ट्राउट रेसवेज एवं अन्य तालाबों का निरीक्षण किया। इन तालाबों में बड़े पैमाने पर मछली उत्पादन को बोर्ड के वैज्ञानिक डा. एन जॉन सैम्यूअल्स एवं डा. अजय पांडेय ने भी सराहा।
निरीक्षण में शामिल शीतजल मत्स्यिकी भीमताल के वैज्ञानिक डा. राघवेंद्र सिंह ने ट्राउट फिश फार्म पर ब्रीडिंग कराकर ट्राउट मत्स्य बीज उत्पादन की योजना बनाने की बात कही। इस दौरान मत्स्य पालकों एवं विभागीय अधिकारियों ने कहा कि जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए पूर्व की भांति 90 फीसदी अनुदान देने, सिंगोट में श्री नागराजा मत्स्य जीवी सहकारी समिति की जमीन पर ट्राउट मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र एवं फीड मिल स्थापित करने जरूरत बताई। इस मौके पर ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक विश्वेसर प्रसाद, प्रमेंद्र नौटियाल, वीरेंद्र कुकरेती आदि मौजूद रहे।