बड़कोट। कूड़ा निस्तारण को लेकर जिला पंचायत प्रशासन व मंदिर समिति की अनदेखी यमुनोत्री धाम केे लिए मुसीबत बन गई है। हर कोई गंदगी के लिए सरकार व यात्रियों पर आरोप लगाकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में प्रशासन के स्वच्छता अभियान केवल फोटो शूट तक ही सीमित रह गए हैं, जिससे स्वच्छता का असल उद्देश्य पूरा होता हुआ नहीं दिख रहा है।
शनिवार को यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने के समय नदी किनारे भारी मात्रा में कूड़ा जलाया गया था। उस दौरान प्रशासन के आला अधिकारी से लेकर मंदिर समिति के तमाम पदाधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी कूड़ा निस्तारण को लेकर कोई ठोस पहल करने कि कोशिश नहीं की। ऐसा पहली बार नहीं जब धाम में कूड़ा जलाया गया हो। यात्रियों की भीड़ व कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं होने की वजह से धाम में गंदगी का अंबार लगा रहता है। रविवार को खरसाली में नमामि गंगे के तहत जागरूकता फैलाने पहुंचे कर्मचारियों को तीर्थ पुरोहितों द्वारा जमीनी कार्य करने की नसीहत दी गई। स्वच्छता एक विचार है। हर व्यक्ति व संस्था को अपने आसपास के क्षेत्र की स्वच्छता के लिए जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
कोट:
स्वच्छता को लेकर सरकार की ओर से योजनाओं पर भारी खर्चा किया जा रहा है। जिला पंचायत प्रशासन द्वारा भी धाम से मोटी कमाई की जाती है। लेकिन कोई भी जमीनी कार्य नहीं कर रहा है। - जगमोहन उनियाल, उपाध्यक्ष, यमुनोत्री मंदिर समिति।
यमुनोत्री धाम में कूड़ा जलाने को लेकर मुझे कोई जानकारी नहीं है। उच्च अधिकारियों से मिलकर कूड़ा निस्तारण को लेकर वार्ता की जाएगी।
- भगत सिंह राणा, जिला पंचायत सदस्य।
।। खबर दिनेश रावत।।