बड़कोट। जिला प्रशासन ने यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात सुचारु कराने के लिए वैकल्पिक मार्ग का कार्य शुरु करा दिया है। भूवैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आधार पर नए मार्ग को ओजरी में मौजूद वर्तमान सड़क के नीचे से ही बनाया जा रहा है। करीब डेढ़ किमी लंबे इस मार्ग में तारों का जाल लगाकर सुरक्षा दीवार तैयार की जाएगी। इससे बोल्डर और मलबा सड़क पर नहीं आएंगे। जिला प्रशासन ने 24 सितंबर तक मार्ग के तैयार होने का दावा किया है।
उधर, ओजरी के स्लाइड जोन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग 9वें दिन भी बंद रहा। इस दौरान डीएम डा. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने राजमार्ग निर्माण खंड, लोनिवि और भू-वैज्ञानिकों की टीम के साथ ओजरी स्लाइड जोन का निरीक्षण किया। उन्होंने जीएसआई की रिपोर्ट के आधार पर मुख्य सड़क के नीचे से ही मार्ग बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस मार्ग को आसानी से और कम समय में बनाया जा सकता है। हालांकि, इसमें भूस्खलन का प्रभाव पड़ने की संभावना हो सकती है, इसलिए यहां पर सुरक्षा के लिए तार का जाल लगाया जाएगा। उन्होंने राजमार्ग निर्माण खंड के अधिकारियों को एक सप्ताह से पहले इस मार्ग को तैयार करने के आदेश दिए हैं। वहीं तिर्खली से सियाना बैंड वाले पैदल मार्ग के निर्माण पर प्रशासन ने कुछ समय बाद फैसला लेने की बात कही है।
यमुनोत्री धाम सहित 14 गांवों की विद्युत आपूर्ती ठप
बड़कोट। ओजरी डबरकोट में हो रहे भूस्खलन से क्षेत्र की विद्युत लाइन सोमवार को क्षतिग्रस्त हो गई। इससे यमुनोत्री धाम सहित 14 गांवों में 18 घंटे से बिजली गुल है। उधर, क्षेत्र की समस्याओं को लेकर यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से वार्ता करने देहरादून रवाना हुआ है, जो सीएम से मुलाकात कर इस समस्याओं के निदान और मुआवजा दिलाने की मांग करेगा। दल में चैन सिंह रावत, शैलेंद्र राणा और विपिन सिंह आदि शामिल हैं।
मुआवजे के लिए धरने पर बैठे ओजरी के ग्रामीण
बड़कोट। ओजरी के भूस्खलन से हुए नुकसान का मुआवजा न मिलने से नाराज ग्रामीणों ने यमुनोत्री राजमार्ग में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ओजरी गांव के ग्रामीणों ने प्रशासन से 2012 से अब तक के नुकसान का मुआवजा मांगा है। ग्रामीणों ने मुआवजा नहीं मिलने तक आंदोलन की चेतावनी दी है।
ग्राम प्रधान पुष्पा चौहान का कहना है कि वर्ष 2012 से लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण ग्रामीणों की कृषि भूमि और कई गौशालाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं। प्रशासन से कई बार शिकायत करने के बावजूद आज तक कोई कदम नहीं उठाया गया। उधर, डीएम ने कहा कि भूस्खलन बंद होने के बाद प्रभावित क्षेत्र का सर्वे किया जाएगा। इसके बाद ही मुआवजे की कार्रवाई की जाएगी। डीएम के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त कर दिया है।