बड़कोट। ओजरी के पास हो रहे भूस्खलन के कारण यमुनोत्री हाईवे आठवें दिन भी नहीं खुल पाया। हालांकि यात्रियों की प्रशासन हर संभव मदद कर रहा है, लेकिन ग्रामीणों की समस्याओं का नजर अंदाज किया जा रहा है। ओजरी से यमुनोत्री के बीच के करीब 14 गांवों में आपदा से ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ रहा है। आलू और चौलाई की तैयार फसल को बाजार नहीं भेज पाने व होटल ढाबों में राशन की किल्लत होने से ग्रामीणों का भारी नुकसान हो रहा है।
यमुनाघाटी के क्षेत्र के अधिकतर ग्रामीणों की आजीविका आलू व चौलाई की फसल पर निर्भर है। ऐसे में तैयार फसल के बाजार तक नहीं पहुंचने से ग्रामीणों को बहुत नुकसान हो रहा है। बाड़िया गांव के जगवीर सिंह का कहना है कि देहरादून और सहारनपुर की मंडियों से ही सबसे अधिक कारोबार होता है, लेकिन मार्ग बंद होने से फसल बाजार तक नहीं पहुंच पा रही है। अगर जल्द ही वैकल्पिक मार्ग नहीं बना, तो सारी फसल खेतों में ही बर्बाद हो जाएगी। वहीं, जानकीचट्टी के जगत सिंह का कहना है कि सीजन के वक्त मार्ग बंद होने से होटल और ढाबों में राशन की किल्लत होने लगी है, जिससे कमाई नहीं हो रही है। जल्द ही सीजन भी खत्म हो जाएगा, जिसके बाद आय का कोई जरिया नहीं बचेगा। उधर, एसडीएम मनुज गोयल का कहना है कि वैकल्पिक मार्ग बनाना ही हमारा मुख्य लक्ष्य है, जिसके लिए सभी कागजी कार्रवाई पूरी की जा चुकी है। जीएसआई की रिपोर्ट आते ही मार्ग बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।