उत्तराखंड में कुदरत के कहर के बाद बचाव और राहत कार्य जारी है।
सेना के जवान जज्बे के साथ फंसे हुए लोगों को बचाने में लगे हुए हैं। सेना की तारीफ हो रही है, लेकिन पुलिस के खिलाफ शिकायतें हैं।
हरियाणा के बल्लभगढ़ के अहीरवाड़ा क्षेत्र के रहने वाले रिछपाल लांबा का कहना है कि सेना न होती तो हम जिंदा नहीं लौट पाते।
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हालांकि, उन्हें उत्तराखंड पुलिस से शिकायत जरूर है। उनका कहना है कि पुलिस ने रास्ते में फंसे लोगों से मोबाइल छीन लिए।
तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार
जिसने विरोध किया उसके मोबाइल से सिम निकाल लिए गए। पुलिस नहीं चाहती थी कि हम अपने परिजनों को स्थिति तथा प्रशासन की नाकामी के बारे में किसी को फोन पर बताएं।
मौत को सामने देखा
रिछपाल लांबा ने बताया कि 16 जून की सुबह वह अपने साथियों राजेंद्र अग्रवाल, पवन गोयल, दिनेश मित्तल, अजीत गर्ग के साथ जायलो गाड़ी से उत्तरकाशी के लिए रवाना हुए थे।
वह उत्तरकाशी से पहले गंगोत्री के रास्ते में धरासू बैंड ही पहुंचे थे कि अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। कुछ समय बाद ही बरसात के कारण पहाड़ नीचे की तरफ खिसकने लगे।
ऊपर की तरफ से छोटी गाड़ियां, पत्थर और पेड़ नीचे की तरफ लुढ़कते दिखाई दे रहे थे। मौत सामने दिखाई दे रही थी। इस मार्ग पर करीब दो से तीन हजार लोग फंसे हुए थे।