उत्तराखंड आपदा के बाद राहत के नाम पर सरकार और प्रशासन का रवैया चौकाने वाला है। ऐसा ही एक वाकया ऊखीमठ तहसील की ग्राम पंचायत ल्वारा का है।
इस गांव में 238 परिवारों के लिए मात्र 150 किलोग्राम चावल भेजा गया है। मतलब एक परिवार को 650 ग्राम चावल मिलेगा। मुश्किल में फंसे लोगों के साथ भद्दा मजाक करने से बढ़िया है, सरकार मदद भेजे ही नहीं।
बुधवार को गुप्तकाशी से ल्वारा में प्रशासन ने राहत सामग्री भिजवाई। लेकिन यह राहत सामग्री ग्राम प्रधान के लिए जी का जंजाल बन गई।
ग्राम प्रधान विजया भट्ट ने बताया कि प्रशासन ने तीन कट्टे चावल, नौ पेटी अचार, 11 टिन रिफाइंड ऑयल, नौ कंबल, तीन कट्टे चीनी, एक पेटी दूध पाउडर, दो पेटी बर्तन, दो पैकेट मोमबत्ती, 78 छाते, दो पेटी माचिस, पांच पैकेट बिस्किट सहित अन्य कुछ सामग्री भिजवाई।
सामग्री कैसे वितरित होगी?
गांव में 238 परिवार रहते हैं। ऐसे में राहत सामग्री कैसे वितरित होगी। नौ कंबल किसे देंगे या बर्तन किसे दे पाएंगे। राहत सामग्री के लिए सभी लोग आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने जो फोन नंबर दिए थे, उन पर संपर्क नहीं हो पा रहा है। ऐसे में क्या करें? स्थानीय निवासी महेश बगवाड़ी ने कहा कि गुप्तकाशी में पर्याप्त मात्रा में राहत सामग्री है। इसके असमान वितरण के कारण यह स्थिति आ रही है। यदि ऐसा ही करना है, तो प्रशासन स्वयं पैकेट बनाकर लोगों में वितरित करे।
पुराने कपडे़ जलाए
राहत सामग्री के नाम पर कुछ मददगार पुरानी खाद्य सामग्री और कपडे़ भेज रहे हैं। जिनसे आपदा की चोट खाए लोग आहत हैं। बुधवार शाम सल्या-तुलंगा क्षेत्र में लोगों ने भेजे गए फटे-पुराने कपडे़ जला दिए।
पहचान को दे रहे राहत सामग्री
नारायणकोटी क्षेत्र में लगे एक राहत शिविर से आपदा प्रभावित कोटमा गांव के लोगों को बैरंग लौटना पड़ा। बताया जा रहा है कि यहां कुछ लोग अपनी जान पहचान वालों को चुपचाप राहत सामग्री दे रहे हैं। जबकि वह प्रभावित नहीं हैं।