चुनाव नजदीक आते ही उत्तराखंड में राजनीतिक उठापठक तेज हो गई है। लगभग सभी पार्टियों ने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। नेताओं के दल बदलने का सिलसिला भी जारी है। प्रदेश में सियासी पारा हाई है। राजनीतिक नेताओं की बयानबाजी और गुटबाजी भी तेजी से सामने आने लगी है। ऐसे में क्या है उत्तराखंड में राजनीतिक हलचल?
हरीश रावत का दावा- उत्तराखंड में तीसरी पार्टी के लिए कोई जगह नहीं
उत्तराखंड में आप की संभावनाओं पर कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि राज्य में किसी तीसरी पार्टी के लिए कोई मौका नहीं है। इतिहास इसका गवाह रहा है। पहले भी जो पार्टियां थीं, वे धीरे-धीरे गायब हो गई हैं। यूकेडी भी इसका एक उदाहरण हैं, जिसका संघर्ष का इतिहास रहा है, लोगों ने उसे भी इतिहास की थैली में धकेल दिया है।
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प्रचार के लिए मसूरी पहुंचे अभिनेता 'देवानंद'
अभिनेता देवानंद के डुप्लीकेट किशोर भानुशाली उत्तराखंड में 12 फरवरी तक भाजपा के लिए प्रचार करेंगे। उन्होंने मसूरी के ग्रीन चौक और भगत सिंह चौक पर नुक्कड़ नाटक पेश कर भाजपा के लिए प्रचार किया। उन्होंने कहा कि वह जिंदगीभर के लिए भाजपा से जुड़े हैं।
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27 गांव के बच्चों ने बनाया मांग पत्र, पढ़िए क्या है इसमें
चुनावी माहौल को देखते हुए आयोजित हुई बाल संगठनों की बैठक में 27 गांव, बस्ती व शहर के 1253 बच्चों ने अपना मांग पत्र बनाया है।
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कांग्रेस हाई कमान के वीटो के बाद ही हुई हरक सिंह की पार्टी में इंट्री
माना जा रहा है कि हरक सिंह रावत ने अपने करीबी और भाजपा के विधायक उमेश काऊ के साथ अगली राजनीतिक पारी का खाका तैयार कर लिया था। कांग्रेस के भी कुछ नेता हरीश रावत पर लगाम कसने के लिए इस रणनीति को आगे बढ़ाने में जुट गए थे। इसकी पृष्ठभूमि यशपाल आर्य के पार्टी में लौटने के बाद ही बन गई थी, लेकिन इस राजनीतिक चाल को हरीश रावत को समझने में जरा भी देर नहीं लगी।
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जीत की उम्मीद में कांग्रेस पी गई अपमान का घूंट
उत्तराखंड कांग्रेस में पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की वापसी के साथ ही यह कहावत एक बार फिर चरितार्थ हुई है कि राजनीति में न तो कोई स्थायी मित्र है न शत्रु। पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उत्तराखंड की ओर बेहद उम्मीदों से देख रही है। जीत की उम्मीद में वह उस अपमान के घूंट को भी पी गई, जिसका विलाप वह पिछले पांच साल से करती आ रही थी।
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Uttarakhand Election 2022: बची 11 सीटों पर भाजपा का मंथन जारी
भाजपा को हॉट सीट डोईवाला और कोटद्वार समेत 11 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी करनी है। इन सभी सीटों पर भाजपा नाम फाइनल नहीं कर पाई है।
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उत्तराखंड सत्ता संग्राम 2022: जब स्थानीय के नाम लेफ्ट और राइट ने मिलाई थी कदमताल
ऐसा पहला चुनाव वर्ष 1968 में हुआ था। तब हरिद्वार विधानसभा सीट को परवादून सीट कहा जाता था, जिसका विस्तार ऋषिकेश और डोईवाला तक था।
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