एसएसपी आफिस के वायरलेस टावर से उतरने के बाद दोनों श्रमिकों ने अपनी बहाली की मांग को लेकर फिर आंदोलन शुरू कर दिया है। श्रम विभाग के अधिकारियों के अनुसार मंगलवार को मिंडा कंपनी का हायर मैनेजमेंट श्रमिकों से वार्ता करने के बाद उनकी बहाली करने या न करने पर निर्णय लेगा।
करीब छह माह पहले सिडकुल स्थित मिंडा कंपनी ने अपने यहां कार्यरत 26 कर्मचारियों को निकाल दिया था। इसके विरोध में 78 और कर्मचारियों ने कंपनी से बाहर निकलकर उनका समर्थन किया और एएलसी कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज कराने के बाद वहीं धरने पर बैठ गए। 22 दिन पहले धरने पर बैठे 11 कर्मचारियों ने अनशन शुरु किया।
इसमें से कुछ दिन बाद ही स्वास्थ्य में गिरावट आने पर छह अनशनकारियों को हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। पांच अनशनकारी फिर भी डटे रहे। इसी बीच गुरुवार शाम को एक अनशनकारी राजेंद्र संभल अपने साथी जगदीश कुमार के साथ एसएसपी कार्यालय में लगे करीब 60 फिट के वायरलेस टावर पर चढ़ गया और निकाले गए सभी कर्मचारियों की बहाली की मांग करने लगा। जिला और पुलिस प्रशासन ने 24 घंटे लगातार मेहनत करने के बाद शुक्रवार आधी रात के समय दोनों कर्मचारियों को टावर से नीचे उतारा।
टावर से नीचे उतारने के लिए कर्मचारियों को आश्वासन दिया गया था कि मंगलवार को मिंडा कंपनी का हायर मैनेजमेंट उनसे वार्ता कर सकारात्मक हल निकालेगा। टावर से उतरने के बाद जहां राजेंद्र ने अपना अनशन जारी रखा। वहीं जगदीश भी अन्य कर्मचारियों संग आंदोलन में शामिल हो गया। मामले को लेकर एएलसी उमेद सिंह चौहान का कहना है कि श्रमिकों के टावर पर चढ़ने के दौरान हुई वार्ता में कंपनी प्रबंधन ने 26 कर्मचारियों को छोड़कर सभी की बहाली करने की बात कही क्योंकि 26 कर्मचारियों का मामला कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन कर्मचारी एक साथ सभी की बहाली की जिद पर अड़े हैं। इसके चलते मंगलवार को कंपनी के हायर मैनेजमेंट के पहुंचने के बाद वार्ता की जाएगी और बहाली करने या न करने का निर्णय लिया जाएगा।