संपूर्णानंद सेंट्रल जेल में एक हजार कैदियों को रखने के लिए जेल का विस्तार करने की कवायद शुरू हो गई है। जेल प्रशासन ने राज्य अवस्थापना विकास निगम को पत्र लिखकर निर्माण का प्रस्ताव मांगा है। जेल अधीक्षक ने बताया कि निगम से प्रस्ताव बनने के बाद आईजी कारागार को भेजा जाएगा।
वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) की 22 एकड़ भूमि पर 512 कैदियों की क्षमता वाली सेंट्रल जेल की स्थापना की थी। इसका शुभारंभ वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी ने किया था। जेल का अभी तक पूरी तरह निर्माण नहीं हो पाया है। 2011 में अधूरी जेल को ही चालू कर दिया, वर्तमान में जेल में क्षमता से अधिक 681 कैदी सजा काट रहे हैं। बीती 13 नवंबर 2017 को कारागार महानिरीक्षक (आईजी) डा. पीवीके प्रसाद ने जेल का निरीक्षण किया और एक हजार क्षमता वाली जेल का निर्माण करने के लिए जेल प्रशासन को प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद जेल प्रशासन सेंट्रल जेल का विस्तार करने की योजना तैयार करने में लगा है। जेल के अधिकारियों ने राज्य अवस्थापना विकास निगम को पत्र लिखकर उनसे एक हजार क्षमता वाली जेल निर्माण का प्रस्ताव मांगा है। जेल अधीक्षक टीडी जोशी ने बताया कि इस जेल का विस्तार करने के लिए कार्यदायी कंपनी राज्य अवस्थापना विकास निगम ही प्रस्ताव बनाएगी। इसमें बैरिक और शौचालय आदि बनेंगे। निगम से प्रस्ताव मिलने के बाद आईजी को भेजा जाएगा।
जेल परिसर में नहीं बिजली, गेट भी खुले
संपूर्णानंद सेंट्रल जेल का निर्माण अधूरा होने से अधिकारियों की नींद उड़ी रहती है। जेल में आज भी महिला बैरिक, बाल बैरिक और अस्पताल नहीं हैं। इसके अलावा जेल परिसर में बिजली और निगरानी के लिए बनाए जाने वाले दीवार से सटे रास्ते भी नहीं बने। जेल परिसर के भीतर बने बैरिकों के गेट खुले पड़े हैं, कई गेटों की मरम्मत होनी है। कारागार विभाग का जेल का विस्तार करने का कदम तो बेहतर है, लेकिन अधूरी जेल में सुविधाएं भी पूरी होनी चाहिए, ताकि जेल में रहने वाले कैदियों की सुरक्षा के साथ-साथ कैदी भी स्वस्थ रह सकें।