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आधी अधूरी तैयारी के साथ शुरु हुआ तहसील का कामकाज

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सहांसनी देवी। - फोटो : KASHIPUR
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लॉकडाउन के कारण पांच महीने से बाधित हुआ तहसील का कामकाज अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सका है। 18 अगस्त से ई-डिस्ट्रिक्ट काउंटर शुरू तो हो गया है लेकिन जसपुर से काशीपुर तहसील में मिलाए गए 19 गांव अभी तक ई- डिस्ट्रिक से नहीं जुड़ सके हैं। खतौनियां अपडेट न होने से दाखिल- खारिज के मामले भी लंबित पड़े हैं।
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कोरोना संक्रमण के चलते तहसील में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया था। यहां से जरूरतमंदों को राशन वितरण के साथ ही प्रवासी लोगों को गंतव्य तक पहुंचाने का काम किया गया। तहसील का पूरा स्टाफ इसी कार्य में व्यस्त रहा जिसके चलते दफ्तर में कामकाज नही हो सका। पिछले डेढ़ माह से काश्तकारों को नई फसली की खतौनियां मिलनी भी शुरू हो गई थी लेकिन रिकार्ड रूम बंद रहने के कारण पुरानी फसली की खतौनियां नही मिल पा रही थी।
ई-डिस्ट्रिक्ट जनाधार काउंटर का काम शुरु हो चुका है लेकिन जिले से आईडी न मिल पाने के कारण नए गांवों को ई- डिस्ट्रिक से नहीं जोड़ा जा सका है। तहसीलदार वीसी पंत का कहना है कि जल्द ही नये गांवों के अभिलेख ऑनलाइन कर दिए जाएंगे।
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2016 में मेरा जाति प्रमाणपत्र मानपुर के पटवारी की रिपोर्ट पर बना था। 17 मार्च को मैने जाति प्रमाणपत्र के लिए फिर से आवेदन किया था। लेकिन लेखपाल ने यह कहकर रिपोर्ट लगाने से इनकार कर दिया कि उसका आवास बैलजूड़ी के हल्के में आता है। इसके चलते चार माह बाद भी उसका प्रमाणपत्र नही बन सका।
सर्वेश कुमारी, मानपुर।
10 अगस्त 2018 को मेरे पति विनोद कुमार की मृत्यु हो चुकी है। उनके नाम दर्ज भूखंड के विरासतन दाखिल खारिज के लिए चार माह पूर्व आवेदन किया था। लंबी छुट्टी के बाद हल्का लेखपाल लौट आई हैं लेकिन कभी कार्यालय में नहीं मिलती जिस कारण विरासतन दर्ज नही हो पा रही है।
गीता देवी, गोपीपुरा काशीपुर।
मेरे पति की मृत्यु हो चुकी है। मेरी उम्र 85 वर्ष है, बच्चे अपने परिवारों के साथ अलग रहते है। भरण पोषण को पेंशन स्वीकृत कराने के लिए कई माह से तहसील के चक्कर लगा रही हूं लेकिन पेंशन के संबंध में कागज तैयार नहीं हो पा रहे हैं।
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सहांसनी देवी, फ्रेंडस कालोनी काशीपुर।
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