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Rudrapur News: नसों में नशा, युवाओं का भविष्य अंधकार में फंसा...नशे की गिरफ्त में महिलाएं

Mon, 30 Oct 2023 11:12 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर

सार

ये कहानी ड्रग्स के आदी हर उस युवा की है, जो अब लत को छुड़ाने के लिए मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग या फिर नशा मुक्ति केंद्र में इलाज करवा रहा है। शौकसे शुरू हुई ड्रग्स की लत छुड़वाने के लिए मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में हर माह करीब 20 लोग आ रहे हैं।
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नशे की गिरफ्त में युवा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पैसे की जरूरत पूरा करने के लिए दीपक (काल्पनिक नाम) 12वीं पास करते ही पहले चरस और फिर स्मैक बेचने लगा। धीरे-धीरे उसे भी इसकी लत लग गई। जब स्मैक का नशा भी कम पड़ने लगा तो उसने हेरोइन को नशे के इंजेक्शन के साथ लेना शुरू कर दिया। इंजेक्शन के नशे से उसके दोस्त की मौत हो गई। अब वह अनिंद्रा और अवसाद की समस्या से जूझ रहा है।

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कुछ ऐसा ही हाल कॉलेज में पड़ने वाले विपिन (काल्पनिक नाम) का है। उसने पहले दोस्तों के साथ सिगरेट पीना शुरू किया। फिर एक दिन दोस्तों ने उसे स्मैक का नशा कराया। पैसों की कमी होने पर वह नशे के इंजेक्शन लगाने लगा। नशे की गिरफ्त में आए इस नौजवान का कॅरिअर चौपट हो गया। अब वह नशे की लत से निजात पाने के लिए नशा मुक्ति केंद्र की शरण में है।

ये कहानी ड्रग्स के आदी हर उस युवा की है, जो अब लत को छुड़ाने के लिए मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग या फिर नशा मुक्ति केंद्र में इलाज करवा रहा है। शौकसे शुरू हुई ड्रग्स की लत छुड़वाने के लिए मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में हर माह करीब 20 लोग आ रहे हैं। वहीं शराब छुड़वाने के लिए दस से 15 मरीज आते हैं। अधिकतर मरीजों की उम्र 18 से 35 साल के बीच की है। 
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अधूरा इलाज करा रहे मरीज
50 प्रतिशत मरीज आधे में इलाज छोड़ रहे हैं। काउंसलिंग और दवाइयों से एक नियमित और लंबी प्रक्रिया से मरीजों का इलाज किया जाता है। मरीज की तबीयत में सुधार होता देख लोग आधे में ही इलाज छोड़ देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मादक द्रव्यों की लत का उपचार एक जटिल और बहुआयामी प्रक्रिया है। इसमें परामर्श, दवा और समग्र समर्थन का संयोजन शामिल है।  

महिलाएं भी नशे की गिरफ्त में
हर साल ड्रग्स लेने वालों में महिलाओं की संख्या भी बढ़ रही है। पहले हर माह एक या दो महिलाएं उपचार के लिए पहुंचती थीं लेकिन अब यह संख्या बढ़कर पांच से छह हो गई है। एक 13 साल का बच्चा भी ड्रग्स की लत छुड़ाने के लिए आ चुका है। 

केस-1
रुद्रपुर के रहने वाले 26 साल से छात्र ने दिल्ली इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए दोस्तों के साथ बीयर पीना शुरू किया था। कोविड के दौरान जब शराब की दुकानें नहीं खुली तो कुछ दोस्तों के साथ चरस और फिर स्मैक लेना शुरू कर दिया। बिना स्मैक लिए उसका शरीर कांपने लगता। तबीयत खराब होने पर घरवाले इलाज के लिए अस्पताल लेकर आए।

केस-2
शहर की एक बस्ती में रहने वाले युवक को शुरूआत में शराब पीने की लत लग गई। इसके बाद वह नशे के इंजेक्शन लेने लगा। जब तक पैसे थे तो वह नशे की सामग्री खरीदने लगा। कुछ समय उसने उधार लेकर नशा किया लेकिन जब उसे पैसे मिलना बंद हुए तो वह चोरी करने लगा। कुछ समय पहले वह चोरी करने के आरोप में जेल भी जा चुका है।

ड्रग्स अक्सर अवसाद, चिंता और मनोविकृति जैसी मानसिक बीमारियों के साथ होता है। लत के मूल कारणों को दूर करने के लिए इन स्थितियों का इलाज करना आवश्यक है। छोटे बच्चों और महिलाओं तक इसकी पहुंच बताती है कि यह कितनी आसानी से मुहैया हो रहा है। ड्रग्स की सप्लाई चैन को तोड़कर इसके मरीजों को बढ़ने से रोका जा सकता है। - डॉ. ईश कुमार डल्ला, मनोचिकित्सक, मनोरोग विभाग, मेडिकल कॉलेज रुद्रपुर
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