आधी आबादी को बराबरी का हक देने की मांग प्रमुख राजनीतिक दलों मुखर रुप से उठाते रहते हैं। लेकिन चुनाव में टिकट बांटते समय महिलाओं के हक को किनारे कर दिया जाता है। यही कारण है कि राज्य गठन के बाद हुए तीन विधान चुनावों में काशीपुर सहित उससे लगी बाजपुर और जसपुर सीटों में प्रमुख पार्टियों ने एक भी महिला को टिकट नहीं दिया। कुछ महिलाओं ने निर्दलीय और छोटे दलों से चुनाव लड़ने की हिम्मत तो जुटाई, लेकिन वह जनता का भरोसा जीतने में कामयाब नहीं हो सकी।
दरअसल प्रमुख पार्टियां भाजपा में कांग्रेस, बसपा में महिला विंग बेहद सक्रिय हैं। महिलाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए विंग के पदाधिकारी समय-समय पर कार्यक्रम के साथ ही सदस्यता अभियान भी चलाते हैं। पार्टी कार्यक्रमों में महिला नेता की भागीदारी भी दिखाई पड़ती है। चुनाव के समय भी पार्टियों में सक्रिय महिलाएं टिकट की दावेदारी करती रही हैं। लेकिन गिनती की महिलाओं को ही अब तक चुनाव लड़ने के मौके मिल सके हैं। काशीपुर और उससे सटी बाजपुर, जसपुर में पार्टियों ने महिलाओं को टिकट देने की पहल नहीं की है।
उत्तराखंड गठन के बाद वर्ष 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में काशीपुर सीट से न तो किसी पार्टी ने महिला को टिकट दिया और न ही किसी महिला ने चुनाव लड़ा था। हालांकि जसपुर सीट से चुनाव मैदान में उतरी उषा रानी को 2097 और अनुराधा को 315 मतों से संतोष करना पड़ा था।
बाजपुर से चुनाव लड़ने वाली यशोधरा को 12वें स्थान पर संतोष करना पड़ा था। वर्ष 2007 में भी बड़े दलों ने महिलाओं को टिकट देने से परहेज किया था। जिस वजह से काशीपुर में यूकेडी से चुनाव मैदान में उतरी रेखा चौधरी 617, साबिया बेगम 334 और वीना किशोर 130 मत ही ला सकी। जसपुर से उषा रानी 1351, गीता 482 और पुष्पा देवी 286 मत ही ला पाई। वर्ष 2012 में हुए चुनाव में काशीपुर और जसपुर से न तो किसी दल ने महिला को टिकट दिया और न ही किसी महिला ने निर्दलीय मैदान में उतरने की हिम्मत जुटाई थी। बाजपुर से लोकजनशक्ति पार्टी की उम्मीदवार अनीता को छठे स्थान पर संतोष करना पड़ा था। कुल मिलाकर महिलाओं को अधिकारों की बात करने वाली पार्टियां चुनाव के समय टिकट वितरण में उनको नजरअंदाज कर देती हैं।
ऐसा नहीं है कि विधानसभाओं से टिकट के लिए महिलाओं ने अपनी पार्टी के समक्ष दावेदारी नहीं रखी है। काशीपुर विधानसभा में कांग्रेस से इंदुमान, मुक्ता सिंह, अलका पाल और मीनू गुप्ता ने टिकट मांगा है। जसपुर से भाजपा में सीमा चौहान की प्रबल दावेदारी है। वहीं बाजपुर से भी सुनीता बाजवा टिकट की प्रमुख दावेदार है। उन्होंने महिला सम्मेलन में भारी भीड़ जुटाकर अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। ऐसे में अब पार्टियां महिलाओं पर दांव खेलती हैं या नहीं, यह चंद दिनों में ही साफ हो जाएगा।