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खटीमा रेंज के जंगल में गुलदार के हमले में महिला की मौत

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खटीमा से मनोहर राणा - फोटो : Manohar Rana.jpg
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खटीमा। तेंदुए के हमले में एक महिला की मौत हो गई। पुलिस ने नागरिक अस्पताल पहुंचकर शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। खेतलसंडा मुस्ताजर निवासी गीता राणा (35) पत्नी मनोहर सिंह राणा बुधवार को पति के साथ खटीमा रेंज के बूढ़ाबाग क्षेत्र के उत्तरी बनबसा-आठ कंपार्टमेंट के जंगल में ल्यूड़ा का साग तोड़ने गईं थीं। दोपहर करीब दो बजे वह साग तोड़कर घर लौट रहे थे।
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इस दौरान गीता के पति आगे चल रहे थे, तभी घात लगाकर बैठे तेंदुए ने गीता पर हमला कर दिया। जब वह चिल्लाईं तो आगे चल रहे मनोहर सिंह ने तुरंत मुड़कर पत्नी को बचाने के लिए तेंदुए पर डंडे से हमला कर दिया। इस पर तेंदुआ महिला को छोड़कर भाग गया। इसके बाद मनोहर सिंह किसी तरह घायल पत्नी को कंधे पर लेकर गांव के नजदीक पहुंचे और ग्रामीणों को स्थिति की जानकारी दी।
गंभीर रूप से घायल गीता को ग्रामीणों की मदद से नागरिक चिकित्सालय ले जाया गया। वहां डॉक्टर केसी पंत ने गीता को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रशासन ने मामले की सूचना पुलिस को दी। वहीं, खेतलसंडा मुस्ताजर के ग्राम प्रधान पति वीरेंद्र ने घटना की सूचना वन विभाग को दी। अस्पताल पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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सेना में कार्यरत हैं मनोहर सिंह
खटीमा। मृतक गीता राणा के पति मनोहर सिंह राणा सेना में इंडियन आर्मी सर्विसेज कार्प्स (एएससी) का जवान हैं और जो वर्तमान में असोम के लेखावाली में तैनात हैं। मनोहर 23 अक्तूबर को छुट्टी पर घर आए हैं।
17 नवंबर को उनकी छुट्टी खत्म होने वाली थी। दंपति की दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी 15 वर्षीय अंजलि कक्षा नौ में और छोटी बेटी सात वर्षीय रागिनी कक्षा दो में पढ़ती है। इधर, खटीमा रेंज के रेंजर वीएस बिष्ट ने बताया कि महिला पर तेंदुए ने हमला किया है। उसके गले में पंजे के निशान दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही विभाग की ओर से दी जाने वाली आर्थिक सहायता पर कार्यवाही की जाएगी।
तेंदुए से जंग में जीते मनोहर पर गीता जिंदगी से हार गई
हीरा चंद राजपूत
खटीमा। एक अनहोनी ने सेना के जवान मनोहर सिंह राणा के हंसते-खेलते परिवार को उजाड़कर रख दिया। मनोहर सिंह मौत के मुंह से एक बार तो गीता को बचाकर ले ही आए लेकिन गंभीर चोटों के कारण गीता की सांसें टूटती चली गईं। आखिर अस्पताल पहुंचने से पहले ही गीता की मौत हो गई। गीता की दोनों बेटियों अंजलि और रागिनी को रोता बिलखता देख गांव में हर किसी की आंख नम हो गई।
तेंदुए के हमले के बाद पत्नी को बचाने के भरसक प्रयास के बाद भी पत्नी की मौत से मनोहर सिंह राणा बेहद दुखी हैं। मनोहर सिंह ने बताया कि जंगल से लौटते समय वह पत्नी से करीब 50 मीटर दूर थे। अचानक गीता के चिल्लाने की आवाज सुनकर वह मुड़े और दौड़कर गीता के पास पहुंचे। वहां का नजारा देखकर मनोहर सिंह के होश उड़ गए। तेंदुआ गंभीर रूप से घायल हो चुकी गीता को घसीटते हुए जंगल की ओर ले जा रहा था।
मनोहर ने आननफानन में शोर मचाते हुए डंडे से तेंदुए पर हमला शुरू कर दिया। मनोहर तब तक तेंदुए से दो-दो हाथ करते रहे, जब तक तेंदुआ गीता को छोड़कर जंगल में भाग नहीं गया। खून से लथपथ पत्नी को कंधे पर रखकर बदहवाश से मनोहर सिंह गांव की ओर दौड़े।
करीब 65 मीटर की दूरी तय कर जैसे-तैसे मनोहर गीता को लेकर रिहायश में पहुंचे और उसके बाद ग्रामीणों की मदद से लहूलुहान गीता को लेकर अस्पताल पहुंचे लेकिन तब तेंदुए से जंग जीत चुके मनोहर जिंदगी से अपनी गीता को हार चुके थे। सेना के जवान के साहस की क्षेत्र में काफी चर्चा है। जवान मनोहर सिंह राणा पत्नी के पोस्टमार्टम न कराने की बात कह रहे थे। वह बोले कि जब पत्नी ही नहीं रही तो मुआवजा उनके किस काम का...।

06केटीएम04पी- मृतक गीता राणा की बेटियों का साथ फोटो- फोटो : KHATIMA

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