शहर में बड़ी मात्रा में नकली और सिंथेटिक दूध को खपाया जा रहा है। आबादी के लिहाज से कम से कम रोजाना 60 हजार लीटर दूध की जरुरत है, लेकिन उसका भी आधा दूध मिल पा रहा है।
जो दूध मिल भी रहा है, उसमें 15 से 20 फीसदी पानी की मिलावट हो रही है। बाकी खपत नकली और सिंथेटिक दूध पूरी कर रहे हैं। मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने को बनाया गया खाद्य विभाग महज सेंपलिंग लेने तक ही सीमित रह गया है।
दरअसल शहर और उसके सटे गांवों की आबादी करीब 2 लाख है। एक व्यक्ति को रोजाना कम से कम 200 एमएल दूध चाहिए होता है। इस लिहाज से रोजाना 60 हजार लीटर दूध की जरुरत है।
विभागीय आंकड़ों की माने तो शहर में 15 बड़ी डेयरियों से 12 हजार लीटर, सोना फार्म से 4 हजार, दूधियों से 5 हजार, 30 छोटी डेयरियों में 4 हजार और विभिन्न कंपनियों आंचल, अमूल, मदर डेयरी, गोधारा आदि से 5 हजार लीटर रोजाना सप्लाई है। इसके अलावा ठाकुरद्वारा क्षेत्रों से भी ट्रेनों के जरिए दूध की सप्लाई की जाती है।
हालांकि यह दूध भी दूधिए ही घरों और अन्य जगहों पर पहुंचाते हैं। पैक्ड दूध को छोड़ दें तो बाकी जगहों से आने वाले दूधों में पानी की मिलावट होना आम बात है। प्रत्येक घर में किसी न किसी रुप में दूध की जरुरत होती है। इसके अलावा व्यवसायिक जगहों होटल, ढाबे, चाय की दुकानों और अन्य जगहों पर भी दूध की खपत होती है।
लेकिन बाकी 30 हजार लीटर दूध कहां से आ रहा है, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। यह दूध सिंथेटिक और नकली है, जो धड़ल्ले से बनाकर सप्लाई किया जा रहा है।
ट्रेनों से भी आती है दूध की खेप
मुरादाबाद जिले से बड़ी मात्रा में पैसेंजर ट्रेन में दूध की खेप शहर में आती है। रोजाना ट्रेनों में बड़ी संख्या में दूध से भरी कैनें लटकी होती हैं। जब भी ट्रेनों में आने वाले दूध को पकड़ने के लिए खाद्य विभाग की टीम चेकिंग करती है तो दूधिए कैन छोड़कर फरार हो जाते हैं। कुछ समय पहले खाद्य विभाग की टीम छापा मारने पहुंची थी तो उस दिन दूध के कैन ट्रेन से आए ही नहीं।
दो साल में हुए दो सैंपल फेल
खाद्य विभाग मिलावटी दूध को लेकर कितना संजीदा है, इसका अनुमान आंकड़ों से लगाया जा सकता है। पिछले साल दूध के केवल 12 सैंपल ही भरे गए। हालांकि दूध का कोई सैंपल फेल नहीं हो सका। वहीं वर्ष 2014 में 6 सैंपल में से 2 सैंपल फेल हुए थे। जिसके बाद दोनों दूधियों पर मुकदमा दर्ज हुआ था।
सिंथेटिक दूध में खर्चा कम, मुनाफा अधिक
सूत्रों की मानें तो जिले से सटे यूपी के क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में सिंथेटिक दूध बनाया जाता है। दूध में यूरिया, सफेद कैमिकल, शैम्पू और अन्य पदार्थ मिलाकर दूध की मात्रा कई गुना बढ़ा दी जाती है। फेट बढ़ाने के लिए रिफाइंड भी मिलाया जाता है। सूत्रों के मुताबिक फेट बढ़ने के बाद सिंथेटिक दूध के सैंपल फेल होने का खतरा कम रहता है।
सिंथेटिक दूध तैयार करने में खर्चा बहुत कम आता है और मुनाफा बहुत अधिक होता है। इसलिए दूध की सप्लाई धड़ल्ले से की जाती है। क्षेत्र में भी नकली और सिंथेटिक दूध बनने से इनकार नहीं किया जा सकता है। दूधिए भी बड़ी मात्रा में सिंथेटिक दूध की सप्लाई करते हैं।