प्रदेश के संवेदनशील जनपदों में शुमार ऊधमसिंह नगर में अब तक स्थायी डीएम तैनात नहीं हो सका है। प्रभारी डीएम के रूप में जिले की कमान संभाल रहे डा. आशीष श्रीवास्तव के पास मजिस्ट्रेटी पावर नहीं होने से डीएम कोर्ट सवा महीने से ठप पड़ी है। इसके चलते फौजदारी, राजस्व और खनन से जुड़े दर्जनों मामले लंबित चल रहे हैं।
ऊधमसिंह नगर को शुरू से ही जमीनी विवाद, राजस्व और खनन आदि के विवादों को लेकर संवेदनशील माना जाता है। यहां जमीनों को लेकर आये दिन हत्याएं और खनन को लेकर गैंगवार जैसे मामले अधिकतर सामने आते रहे हैं। इन विवादों को निपटाने में डीएम कोर्ट की भूमिका अहम रहती है।
लेकिन जिले में पिछले करीब सवा महीने से स्थायी तौर पर डीएम की नियुक्ति नहीं होने से डीएम कोर्ट से संबंधित कई मामले लंबित चल रहे हैं। वर्तमान में डीएम कोर्ट में फौजदारी के 11, राजस्व के 15 और खनन से जुड़े 7 महत्वपूर्ण मामलों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। वर्तमान में डीएम का कार्यभार देख रहे सीडीओ डा. आशीष श्रीवास्तव को शासन ने सिर्फ प्रशासनिक कार्यों को देखने का दायित्व सौंपा है। उन्हें मजिस्ट्रेटी मामलों के निस्तारण की पावर नहीं है।
प्रदेश में पहली बार आई ऐसी परिस्थिति
ऊधम सिंह नगर का बुरा वक्त टलने का नाम नहीं ले रहा है। यहां डीएम और एसएसपी की तैनाती को लेकर शासन स्तर पर हमेशा से ही बड़े दांव पेंच चलते रहे हैं। पूर्व डीएम अक्षत गुप्ता के निधन से पूर्व उनके स्थानांतरण के बाद डीएम के रूप में आईएएस वीके संत को स्थानांतरित किया गया था, लेकिन उन्होंने यहां के हालातों को देखते हुए चार्ज लेने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद अक्षत गुप्ता भी छुट्टी पर चले गए और अवकाश के दौरान 5 जून को उनका आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन के बाद यहां डीएम की तैनाती को लेकर सरकार भी उलझन में थी।
शासन ने स्थायी डीएम की नियुक्ति करने के बजाय अस्थाई डीएम के रूप में आशीष श्रीवास्तव को चार्ज तो दे दिया, लेकिन सवा माह बीतने को है और शासन अभी तक स्थायी डीएम के नाम पर निर्णय नहीं ले सका है। प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी जनपद में इतने दिन तक स्थायी डीएम की नियुक्ति नहीं हुई हो। इसे लेकर शासन की मंशा पर भी अब सवाल उठने लगे हैं।