अरब देशों में भारतीय बारीक चावल पर 150 प्रतिशत की ड्यूटी लगने से जहां बारीक धान के भाव में जबरदस्त गिरावट आई है। वहीं बारीक चावल अब मध्यम परिवारों की पहुंच में आ गया है। लेकिन इसका सीधा नुकसान व्यापारी को न होकर किसान को हुआ है।
इन दिनों 55 रुपए किलो बाजार में बिकने वाला शरबती चावल 30 रुपए किलो (थोक में) तक बिक रहा है। हालत यह है कि जिस धान का बाजार भाव पिछले साल तक 2000 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल था, वह धान आज 1300 से 1500 रुपए प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है। चावल का निर्यात करने वाले व्यापारियों की मानें तो अरब देशों में बारीक चावल की खपत सर्वाधिक है। बताया कि पिछले वर्ष इन देशों में 150 प्रतिशत की ड्यूटी चावल पर लगा दी थी। इसके चलते यहां का चावल अरब देशों में महंगा पड़ने लगा। परिणामस्वरूप वहां चावल की मांग घट गई। निर्यात नहीं होने पर किसानों से धान की खरीद कम की जाने लगी और धान का भाव गिर गया। इसका नुकसान किसानों को होने लगा। किच्छा के चावल मिल मालिक गोविंद प्रसाद गोयल, सुरेंद्र मित्तल, असीत कुमार सिंह, महेंद्र गोयल, राम निवास जैन आदि ने बताया कि पिछले सालों में बेहतरीन खुशबू वाला 11/21 किस्म का चावल 110 रुपए प्रति किलोग्राम बिक रहा था, जो अब 60 रुपए (थोक) पहुंच गया है। बताया कि शरबती पुराना जो 55 के भाव में था वह 30 रुपए (थोक) में पहुंच गया है। इसकी खेती करने वाले किसान को इसकी औसत पैदावार कम मिलती थी। जबकि भाव अच्छा मिलने से मुनाफा अधिक मिलता था, लेकिन अब बाजार में खरीददारी कम होने से माल की मांग कम और भाव भी गिर गए। बताया कि तराई के अलावा, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर आदि जिलों में इसकी पैदावार खूब है। अब भाव कम मिलने से किसान इस बार इसको बोने से कतरा रहे हैं।