सितारगंज। प्रदेश में पहली बार किसी पीसीएस अधिकारी की नियुक्ति निरस्त कर सेवा समाप्त करने का मामला नजीर तो बन गया लेकिन कहीं डिप्टी बीईओ के पदों पर आसीन अधिकारियों की नौकरी भी खतरे में न पड़ जाए।
सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर एक शिकायतकर्ता ने उप प्रधानाचार्य के लिए चयनित अभ्यर्थियों को विधि के विरुद्ध उप शिक्षाधिकारी पद देने की शिकायत दर्ज कराई है। पोर्टल के जरिये शासन तक पहुंची शिकायत के बाद अब डिप्टी बीईओ के पदों पर भी जांच की तलवार लटक गई है। जिला स्तर के अधिकारी तो इस मामले पर कुछ बोलने से कतरा रहे हैं।
सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर बीते 30 मई को 19473 नंबर और 20 जून को 21676 नंबर से शिकायत दर्ज हुई। इसमें शिकायतकर्ता ने बताया कि माध्यमिक अनुभाग के तत्कालीन शिक्षा सचिव ने 30 जून 2008 को लोक सेवा आयोग को उप प्रधानाचार्य एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती के लिए पत्र लिखा था।
इस पर उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की ओर से उत्तराखंड सम्मिलित राज्य सिविल/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2010 के लिए 11 मार्च 2011 को राइंका, राबाइंका में उप प्रधानाचार्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में वरिष्ठ प्रवक्ता, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद में वरिष्ठ प्रवक्ता व सहायक निदेशक, विधि अधिकारी व उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद में उप सचिव और स्टाफ ऑफिसर पद के लिए 91 पदों पर भर्ती निकाली गई।
इसके लिए अनिवार्य शैक्षिक अर्हता के रूप में शिक्षा शास्त्र में स्नातक बीएड उपाधि व एलटी डिप्लोमा मांगा गया था और भर्ती प्रक्रिया का उत्तराखंड शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा नियमावली 2006 के अनुसार अधियाचन किया गया था।
परीक्षा के बाद 84 अभ्यर्थी चयनित किए गए। इसी बीच माध्यमिक शिक्षा अनुभाग ने 21 मार्च 2015 को लोक सेवा आयोग को पत्र लिखकर बताया कि उप प्रधानाचार्य के पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को उत्तराखंड राज्य शैक्षिक सेवा (प्रशासनिक संवर्ग) के अंतर्गत उप शिक्षाधिकारी व समकक्ष पद पर कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से अस्थायी रूप से नियुक्त करते हुए दो साल की परिविक्षा अवधि पर रखे जाने की राज्यपाल से स्वीकृति मिली है। चार जून 2015 को प्रशिक्षण के बाद तैनाती भी दे दी गई।
यह भी शिकायत की गई कि उप प्रधानाचार्य के पदों पर भर्ती के दौरान उप शिक्षाधिकारी के पद अस्तित्व में नहीं आए। अधियाचन भी नहीं हुआ। ऐसे में उप प्रधानाचार्य को उप शिक्षाधिकारी के पद पर नियुक्ति देना सेवा नियमावली का उल्लंघन है और अर्हताधारी युवाओं के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ किया गया।
शिकायतकर्ता ने सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत की तो शिक्षा विभाग में खलबली मच गई। ब्लॉक स्तर से लेकर राजधानी तक अधिकारी मामले की जांच में जुटे हैं। यदि शिकायत सही निकली तो डिप्टी बीईओ के पद पर आसीन उप प्रधानाचार्य भी हटाए जा सकते हैं।
कोट
शासन की ओर से उप प्रधानाचार्य के पदों को उप शिक्षाधिकारी के पदों में परिवर्तित कर दिया गया होगा। मामला शासन स्तर का है। इसलिए इस पर कुछ नहीं कह सकते। शासन ही इस पर फैसला ले सकता है। - एके सिंह, मुख्य शिक्षाधिकारी, यूएस नगर।