मेलाघाट रोड झनकइया जंगलात चौकी से ऊंची महुवट बाइपास मार्ग की दुर्दशा से त्रस्त ग्रामीणों की बैठक में मार्ग के जीर्णोद्घार पर सहमति नहीं बनी। ग्रामीण जनता ने जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि जलभराव से एक झोपड़ी ढह गयी और एक अन्य मकान की दीवार में दरार पड़ गयी।
दोनों परिवार पलायन कर गए, लेकिन उनकी सुध किसी ने नहीं ली। बैठक में मौजूद ग्राम प्रधान प्रकाश चंद्र जुकरिया को बैठक में वक्ताओं की यह बात नागवार लगी कि गांववासी शासकीय सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि बरसाती पानी के निकास मार्ग अतिक्रमण की चपेट में हैं। ग्रामीण शौचालय के अभाव में खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
बरसात में कच्चे मकान गिरने एवं पक्के में दरार पड़ने से दो परिवार पलायन कर चुके हैं। पूर्णागिरी मंदिर परिसर में हुई बैठक में वक्ताओं ने जनप्रतिनिधियों एवं सरकार पर ग्रामीणों की उपेक्षा की तोहमत मढ़ी। उन्होंने कहा कि घोषणा के बाद गांव में जो दो शौचालय बने हैं उनका अभी तक भुगतान नहीं हुआ। गांव के मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला खड़ंजा जीर्णशीर्ण हालत में है।
ग्रामीणों की मांग पर जनप्रतिनिधियों ने कार्रवाई नहीं करते। इस पर ग्राम प्रधान उखड़ गए उन्होंने कहा बिन प्रस्ताव रखे यह कार्य नहीं होगा। ग्रामीणों ने खुली बैठक की सूचना नहीं देने का आरोप लगाया। बैठक बेनतीजा स्थगित होने पर ग्रामीण जनता ने कहा कि वह मार्ग का जीर्णोद्घार आपसी सहयोग से करेंगे।
बैठक स्थगित होने पर यहां मौजूद लोगों ने बताया कि गांव में भरने वाला बरसाती पानी खंती-पट्टी नाले में हुए कब्जे की देन है। उन्होंने कहा कि सरकारी मशीनरी एवं जन प्रतिनिधि देश के प्रधानमंत्री के स्वच्छता मिशन अभियान को पलीता लगा रहे हैं। लगभग 150 लोग आज भी खुले में शौच को मजबूर हैं।
मकान पर दरार पड़ने एवं झोपड़ी गिरने से दर्शन सिंह गांव से पलायन कर चुका है, जबकि रामदास का कच्चा आवास जलमग्न स्थिति का गवाह बना है। वहां पर लक्ष्मण बोरा, मुन्नी राणा, केदार सिंह, वीरेंद्र चंद, रामदास, गोविंद धामी, महेंद्र भाटिया, राम प्रवेश राणा, रमेश सिंह, बहादुर सिंह, राजकुमार आदि थे।