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कृषि उन्नयन और शोध को सरकार करेगी मदद

Mon, 05 Oct 2015 12:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/ पंतनगर (ऊधमसिंह नगर)।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि कृषि विकास दर को बढ़ाकर रखना जरूरी है। राज्य, केंद्र के नीति बनाने वालों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि भले ही अन्य सेक्टर के लिए कटौती करनी पड़े लेकिन कृषि और कृषि संबंधी शोध के लिए संसाधनों की कमी नहीं होनी चाहिए।
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गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित चार दिनी किसान मेले के समापन अवसर पर श्री रावत ने कहा कि आज कृषि क्षेत्र को बचाए रखने के लिए वैज्ञानिकों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि गन्ना किसानों के 80 फीसदी बकाए का भुगतान नवंबर तक कर दिया जाएगा।

पंतनगर विवि में कृषि क्षेत्र में नए शोध और तकनीक विकसित करने के लिए कुलपति से एक्शन प्लान देने को कहा गया है। विवि कृषि के लिए शोध कार्य जारी रखे। संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी।
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किसान मेले के समापन के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि चीनी मिलों को बचाना है तो गन्ने की पैदावार बढ़ानी होगी।

 इसके लिए पंतनगर विवि के वैज्ञानिक शोध कर गन्ने के नए बीज तैयार करें ताकि प्रदेश में चीनी मिलें बंद न होने पाएं और गन्ना किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी हो।

वर्तमान में अन्य राज्य तो दूर गन्ना उत्पादन के मामले में उत्तराखंड उत्तर प्रदेश से भी पीछे है। उन्होंने कहा कि अभी कृषि क्षेत्र में नई चुनौतियां हैं। केेंद्र से भी कृषि क्षेत्र में प्रदेश को मदद करने की अपेक्षाएं हैं।

पंतनगर को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने की विधायक राजेश शुक्ला की मांग के संबंध में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार केंद्रीय विवि के लिए मदद करे तो हम जगह उपलब्ध करा देंगे, लेकिन पंतनगर विश्वविद्यालय जो देश, दुनिया में अपना नाम रखता है।

यह अपने आप में प्रदेश का गौरव है। इसे केंद्रीय विवि का दर्जा दिलाकर प्रदेश अपना गौरव नहीं खोएगा। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किसान मेले के समापन से पूर्व पंत विवि परिसर में नव निर्मित डा. वाईएल नेने परीक्षण कांप्लेक्स का उद्घाटन किया।

मुख्यमंत्री रावत को पंतनगर किसान मेले के समापन समारोह में 2.40 बजे पहुंचना था। लेकिन वह समारोह स्थल पर 3.07 बजे पहंचे। गांधी हाल में 3.14 बजे प्रवेश किया और 4.17 बजे कार्यक्रम का समापन हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी के गिरते जल स्तर को देखते हुए पहाड़ों में चाल-खाल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भी जल स्तर बचाए रखने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर अधिक जो दिया जाए।

सीएम रावत ने कहा कि विवि प्रबंधन आत्मा, कृषि विभाग, उद्यान विभाग के साथ बैठकों का आयोजन कर किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस पहल करें। इसके लिए एक सेल का गठन करें, ताकि कोई किसान घर बैठे अपनी समस्या बताना चाहे तो उसे तत्काल समाधान मिल जाए।

मुख्यमंत्री ने किसान मेले के समापन अवसर पर कहा कि उत्तराखंड के किसानों का आर्थिक स्तर भी नासिक, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल की तर्ज पर ऊपर उठाने की जरूरत है।

हमें उनके साथ उन्हीं के सीजन में कंपीटीशन में नहीं आना है। वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित करें कि हमारा किसान नासिक से पहले बाजार में प्याज उतार दे और हिमाचल व जम्मू कश्मीर से एक महीना पहले सेब बाजार में पहुंचा दे तो उसे भी अच्छा भाव मिलने से आर्थिक उन्नयन में मदद मिलेगी।

प्रदेश में चारे की समस्या से निजात पाने के लिए सरकार हर स्तर पर समझौता करने को तैयार है। चारा पत्ती की कमी के कारण दुग्ध उत्पादन बड़ी समस्या बना है।

 चारा प्रजाति का पौध रोपित करने वालों को प्रति पौध 300 रुपये सरकार प्रोत्साहन राशि दे रही है। इतना ही नहीं मधुमक्खी पालन और कड़ी पत्ता उगाने पर भी 300 रुपये प्रति पौध 300 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

सीएम ने कहा कि दुग्ध उत्पादन में प्रदेश की मात्र दो दुग्ध समितियां ही लाभ में चल रही थीं। सरकार ने दुग्ध उत्पादकों का चार प्रतिशत बोनस बढ़ाया। अब पांच समितियां लाभ में चल रही हैं और दो लाभ में आने की स्थिति में हैं।
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