विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर मंगलवार को अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स और महिला रुद्रपुर राइजिंग फाउंडेशन के सहयोग से छात्राओं और महिलाओं को माहवारी को लेकर फैली भ्रांतियों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में 71 महिलाओं और छात्राओं ने संकल्प पत्र भरे।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय खेड़ा में आयोजित कार्यशाला में 11 वर्ष से अधिक उम्र की छात्राओं व उनकी मांओं ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में मासिक धर्म पर बनी ऑस्कर अवार्ड प्राप्त भारतीय शॉर्ट फिल्म पीरियड्स के बारे में बताकर महिलाओं को जागरूक किया गया। महिला रुद्रपुर राइजिंग फाउंडेशन की अध्यक्ष चंद्रकला राय ने कहा कि माहवारी में महिलाओं के साथ छुआछूत जैसा व्यवहार महज भ्रांति के कारण होता है। जबकि यह एक शारीरिक प्रक्रिया है। पुराने समय में मासिक धर्म के समय महिलाओं को घर के बाहर और गोशाला में सोना पड़ता था। समाज के कुछ वर्गों में आज भी यह परंपरा चली आ रही है। वहां मीनू जोशी, नीलम कांडपाल, पिंकी तिवारी, हेमलता तिवारी, नेहा चौहान, नेहा सागर, शालिनी शर्मा, अनामिका, रुद्रपुर राइजिंग के अध्यक्ष विजय आहूजा, नेस्ले कंपनी की अपर्णा, करिश्मा, शिवानी, अनुपमा, शिवाली, रूबी, रोहित चौधरी, प्रशांत आदि थे।
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समाज के विभिन्न वर्गों में आज भी मासिक धर्म को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियां हैं। मासिक धर्म एक शारीरिक प्रक्रिया है। मासिक धर्म में महिलाओं को स्वच्छता का विशेष ध्यान देना चाहिए। इसको लेकर किसी प्रकार भ्रांतियां नहीं होनी चाहिए।
- गुलशन, चमेली।
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मासिक धर्म के समय महिलाओं के साथ उपेक्षित व्यवहार नहीं होना चाहिए। आधुनिक समय में भी समाज के कुछ वर्गों में माहवारी के समय महिलाओं के साथ छुआछूत का व्यवहार किया जाता है। इस मुद्दे पर समाज को अपनी सोच बदलनी चाहिए।
- पलक त्यागी, विमलजीत कौर।
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पुराने समय में मासिक धर्म के समय महिलाओं को घर से बाहर गोशाला आदि में रहना पड़ता था। आधुनिकता के इस दौर में आज भी कुछ स्थानों पर महिलाओं के साथ माहवारी के समय ऐसा ही व्यवहार किया जाता है, जो निंदनीय है।
- किरन राजपूत, फिजा।
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मासिक धर्म महिलाओं को मिला मातृत्व का एक वरदान है। इन दिनों में भ्रांतियों के चलते महिलाओं का तिरस्कार नहीं होना चाहिए बल्कि ऐसे में उनका अधिक से अधिक ख्याल रखना चाहिए। -
रानी, पलक नारंग।
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महिलाओं और छात्राओं को अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक होना चाहिए। समाज में माहवारी को लेकर फैली भ्रांतियों को बदलने के लिए महिलाओं को खुद ही पहल करनी होगी।
- सोनम सिंह, प्रिया।
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