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उद्योगों से हुए बेरोजार तो खेतों में गेहूं कटान कर चला रहे परिवार

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काशीपुर (ऊधमसिंह नगर)। लॉकडाउन के बाद उद्योगों से बेरोजगार हुए मजदूर अब खेतों में किसानों का गेहूं काटकर अपना परिवार चलाने को मजबूर हैं। वहीं किसानों को भी मजदूर नहीं मिल पाने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि एक एकड़ गेहूं काटने पर मजदूरों को करीब चार सौ से लेकर पांच सौ रुपये मिल रहे हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए लॉकडाउन को तीन मई तक बढ़ा दिया गया है। हालांकि इस अवधि में भी उद्योग करीब-करीब बंद चल रहे हैं। ऐसे में उद्योगों में काम करने वाले हजारों मजदूर इस समय बेरोजगार हो गए हैं। वहीं बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों का उत्तराखंड में प्रवेश बंद है। यूपी से लगी सीमाओं को पुलिस ने सील कर दिया है। इससे खेतों में फसल की कटाई के लिए मजदूर नहीं आ पा रहे हैं। जिससे किसानों के सामने भी फसल कटाई के लिए मजदूरों की समस्या बनी हुई है। उद्योगों में अधिकांश मजदूर बाहरी राज्यों के रहने वाले हैं। लॉकडाउन के चलते वह भी घर नहीं जा पा रहे हैं। इससे उनके सामने परिवार के खाने की व्यवस्था करने का संकट खड़ा हो गया है। बताया जाता है कि जब किसानों को पता चला कि कारखानों के मजदूर बेरोजगार हो गए तो उन्होंने मजदूरों से संपर्क किया। तब मजदूरों ने किसानों के खेतों में गेहूं की कटाई शुरू कर दिया, जिससे किसानों और मजदूर दोनों को राहत मिल रही है। भाकियू नेता वलजिंदर संधु ने कहा कि लॉकडाउन से बेरोजगार घरों में बैठे मजदूरों ने किसानों के खेतों में गेहू कटाई की है, जिससे किसानों को भी राहत मिली और खाली बैठे मजदूरों को मजदूरी मिल रही है।
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