रुद्रपुर। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा पिछले 15 दिन से ठप पड़ी है। इस कारण रोजाना सैकड़ों गरीब मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में मरीजों और तीमारदारों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है। गरीब मरीजों के लिए परेशानी सबसे ज्यादा बढ़ गई है।
पहले अल्ट्रासाउंड विभाग में तैनात रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अभिलेश का तबादला हो गया था। इसके बाद डॉ. सतवंत सिंह का भी तबादला हो गया। उनके जाने के बाद विभाग में कोई स्थायी डॉक्टर तैनात नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ कि अल्ट्रासाउंड मशीन होने के बावजूद रिपोर्ट बनाने वाला कोई नहीं है। रोजाना ओपीडी में 800 से 1000 मरीज पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या गर्भवतियों, बच्चों और गंभीर बीमारियों के मरीजों की होती है जिन्हें डॉक्टर अल्ट्रासाउंड की सलाह देते हैं।
सेवा बंद होने से मरीजों को जिला अस्पताल में 100 से 500 रुपये तक में मिलने वाली अल्ट्रासाउंड की सुविधा के लिए बाहर जांच कराने पर 1200 से 2500 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं, बीपीएल कार्डधारकों के लिए यह सहूलियत है कि वे पर्चा बनवाते समय यदि अपना कार्ड दिखा दें और यदि उनको जरूरत पड़े तो उनका अल्ट्रासाउंड मुफ्त में होता है।
मरीजों की पीड़ा
डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड लिख दिया लेकिन अस्पताल में यह जांच हो नहीं रही है। बाहर जांच कराने में 1800 रुपये लग गए जबकि सरकारी अस्पताल में यह बहुत कम में हो जाता। सीमा देवी, ट्रांजिट कैंप
गरीब आदमी अल्ट्रासाउंड कहां से कराए? अस्पताल में डॉक्टर ने दवा देने से पहले जांच के लिए भेज दिया लेकिन अस्पताल में जांच नहीं हुई। मजबूरी में निजी लैब में जाना पड़ा। - कविता शर्मा, आदर्श कॉलोनी रुद्रपुर
दिहाड़ी छोड़कर बच्चे को अस्पताल में दिखाने आया था लेकिन यहां जांच नहीं हुई। मजबूरी में अब बाहर अल्ट्रासाउंड कराने जा रहा हूं। आज कुछ कमाई भी नहीं की और मुफ्त में होने वाली जांच के लिए बाहर जेब भी खाली करानी पड़ेगी। - प्रकाश कुमार
रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की मांग की गई है। तब तक के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द डॉक्टर आने से अल्ट्रासाउंड शुरू हो जाएंगे। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ