उत्तराखंड के 13 में से चार जिलों में गन्ने की खेती की जाती है। हालांकि पायलट प्रोजेक्ट के तहत पिथौरागढ़ और चमोली में भी कम क्षेत्र में गन्ने की बुआई की गई है। प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता के लिए सबसे उपयुक्त जमीन ऊधमसिंह नगर साबित हो रही है। यहां गन्ने की पैदावार अन्य जिलों के मुकाबले सबसे अधिक है। वहीं फसल की बुआई में हरिद्वार सबसे आगे है।
देश में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की उत्पादकता सबसे अधिक होती है। उत्तराखंड में भी चार जिलों में गन्ने की बुआई की जाती है। प्रदेश के पिथौरागढ़ और चमोली जिले में गन्ने की पैदावार के लिए प्रयास किए गए हैं। सबसे अधिक गन्ना हरिद्वार में उत्पादित होता है। इस बार 64007 हेक्टेयर में गन्ने की खेती की गई है, जिसमें प्रति हेक्टेयर 817 क्विंटल के हिसाब से करीब 52293719 क्विंटल गन्ना पैदावार होने की उम्मीद जताई जा रही है जबकि ऊधमसिंह नगर में 20827 हेक्टेयर में गन्ने की बुआई की गई है। इसमें 866 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 18,036,182 क्विंटल पैदावार होना अनुमानित है।
नैनीताल में 1591708 क्विंंटल पैदावार होने की उम्मीद
नैनीताल जिले में 1838 हेक्टेयर में गन्ने की बुआई की गई है, जिसमें 866 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 1591708 क्विंंटल पैदावार होने की उम्मीद जताई जा रही है। देहरादून में 3692 हेक्टेयर में बुआई हुई है, जिसमें 747 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 2757924 गन्ना होने की उम्मीद है। इस प्रकार प्रदेश में 90364 हेक्टेयर में किसानों ने गन्ने की बुआई की है, जिसमें 27,615,533 क्विंटल पैदावार होने की उम्मीद है। पहाड़ों पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत पिथौरागढ़ और चमोली में गन्ने की बुआई की गई है। यह सफल होने पर गन्ने की मात्रा बढ़ाई जाएगी।
गन्ना कृषकों को गोष्ठी के माध्यम से लगातार गन्ने की खेती के प्रति जागरूक किया जा रहा है। ताकि पैदावार अच्छी हो। पिछली बार बरसात के कारण गन्ने की पैदावार पर काफी असर पड़ा था। हालांकि इस बार पैदावार अच्छी होने की उम्मीद है। सभी जिलों में गन्ने की स्थिति अच्छी है।
- निलेश कुमार, प्रचार एवं जनसंपर्क अधिकारी, गन्ना विभाग