रुद्रपुर सिटी और हल्दी रोड रेलवे स्टेशन के बीच ट्रेन की चपेट में आकर दो मादा हाथियों की मौत हो गई। वन अधिकारियों ने पोस्टमार्टम के बाद हाथियों के शव रुद्रपुर रेंज के जंगल में दफन कर दिए। वन विभाग के अनुसार ट्रेन की तेज रफ्तार हाथियों की मौत का सबब बनी है, जांच के बाद ट्रेन चालक के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोनों की उम्र दो से तीन साल आंकी जा रही है।
जैसलमेर से काठगोदाम जा रही 15013 रानीखेत एक्सप्रेस सोमवार सुबह करीब तीन बजे हल्दी रोड स्टेशन के पिलर नंबर 5717 पर पहुंची थी। इसी दौरान हाथी के दो बच्चे ट्रेन की चपेट में आ गए। ट्रेन की टक्कर लगने से दोनों झाड़ियों में छिटककर गंभीर रूप से घायल हो गए। डीएफओ तराई केंद्रीय वन प्रभाग डा. कल्याणी, एसडीओ उमेश चंद्र तिवारी, वन दरोगा उमेश चंद्र जोशी और बीट अधिकारी गजेंद्र पाल सिंह पंतनगर विवि के डाक्टरों की टीम को लेकर मौके पर पहुंचे, लेकिन उससे पहले ही घायल हाथी दम तोड़ चुके थे।
हल्दी रोड रेलवे स्टेशन मास्टर एसडी यादव ने बताया की हाथियों के टकराने पर चालक ने तुरंत ट्रेन रोककर स्टेशन पर हादसे की सूचना दी। दुर्घटना के चलते ही ट्रेन बीस मिनट देरी से हल्दी स्टेशन पहुंची। पोस्टमार्टम के बाद दोनों मृत हाथियों को रुद्रपुर रेंज के जंगल में दफना दिया गया है।
मामले को लेकर वन दरोगा उमेश चंद जोशी का कहना है कि छतरपुर से लालकुआं तक रेल पटरी जंगल के बीच है। पटरी के आसपास वन्य जीव भी घूमते रहते हैं। ऐसे में ट्रेन चालकों को गति धीमी रखनी चाहिए। घटनास्थल से हल्दी स्टेशन की दूरी भी मात्र दो किमी है और नियमानुसार स्टेशन से दो मीटर दूरी पर ट्रेन की स्पीड को कम कर दिया जाता है। चूूंकि मरने वाले एक हाथी के सिर में और दूसरे के पेट में चोट लगी है जिससे स्पष्ट है कि हाथी पटरी पर नहीं थे बल्कि पटरी के दाएं और बाएं थे। ट्रेन की साइड लगने से उनकी मौत हुई। ऐसे में अगर ट्रेन की रफ्तार कम होती तो हाथी सिर्फ घायल होते, लेकिन ट्रेन से टकराने के कुछ ही देर बाद उनका मर जाना इस बात की पुष्टि करता है कि ट्रेन से उन्हें जबरदस्त टक्कर लगी है और ऐसा सिर्फ ट्रेन की तेज रफ्तार से ही हो सकता है। जोशी के अनुसार फिलहाल मामले की जांच की जा रही है जांच में अगर ट्रेन चालक दोषी पाया गया तो उसे खिलाफ भी आवश्यक कार्रवाई की जायेगी।