रुद्रपुर नैनीताल रोड पर पलटी जेएनएनयूआरएम की सिटी बस
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काठगोदाम डिपो से वाया रुद्रपुर टनकपुर जा रही परिवहन निगम के अधीन संचालित जेएनएनआरयूएम की सिटी बस बाइक सवार को बचाने के चक्कर में एनएच 87 पर पलट गई। हादसे में बस में सवार आधा दर्जन यात्रियों और बस चालक को मामूली चोटें आई हैं। यात्री सामने के टूटे शीशे से के रास्ते बाहर निकले। निगम अधिकारियों की लापरवाही से बस को घंटों तक घटनास्थल से हटाया नहीं गया।
शनिवार सुबह काठगोदाम डिपो की जेएनएनआरयूएम की सिटी बस (यूके04पीए 0230) रुद्रपुर के रास्ते टनकपुर के लिए चली थी। बस में चालक-परिचालक के अलावा 15 यात्री सवार थे। डीएम आवास मार्ग के सामने एनएच 87 पर सामने से तेज गति से आ रही बाइक को बचाने के चक्कर में बस अनियंत्रित होकर डिवाइडर चढ़ गई और सड़क पर पलट गई। हादसे में चालक समेत कुछ यात्री चोटिल हो गए। घबराए यात्री चालक कक्ष के टूटे शीशे के रास्ते बाहर निकले। डिवाइडर में चढ़ने के दौरान बस का टायर फट गया। हादसे के करीब दो घंटे बाद रोडवेज प्रबंधन ने क्रेन के जरिए बस को घटनास्थल से हटाया। हल्द्वानी निवासी बस चालक भूपाल सिंह ने बताया कि डीएम आवास से अचानक बाइक सामने आ गया था। उसे बचाने के बस को दाहिनी तरफ मोड़ा था। इससे बस डिवाइडर में चढ़कर पलट गई। जेएनएनआरयूएम की सहायक महाप्रबंधक नीमिषा भट्ट ने बताया कि हादसे में कोई भी यात्री गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है।
एक ही परिक्षेत्र के डिपो समन्वय का अभाव
नैनीताल परिक्षेत्रों के विभिन्न रोडवेज डिपो में आपसी समन्वय का बेहद अभाव है। शनिवार को काठगोदाम से रुद्रपुर रोडवेज स्टेशन आ रही बस के संचालन व हादसे के बारे में एआरएम श्रीरामकौशल को किसी प्रकार की सूचना नहीं थी। इस बस को टनकपुर जाने से पहले रुद्रपुर डिपो भी पहुंचना था। हल्द्वानी डिपो के अधिकारी भी बस के संचालन की जानकारी नहीं दे सके। इस कारण बस घटनास्थल पर घंटों तक पड़ी रही।
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प्रदेश में दौड़ाकर सिटी बसों को कर दिया खटारा
भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय के तहत संचालित जेएनएनयूएआरएम की बसें उत्तराखंड परिवहन निगम को भी मिली थी। वर्ष 2010 में तत्कालीन परिवहन मंत्री बंशीधर भगत ने हल्द्वानी में जेएनएनआरयूएम की बसों का शुभारंभ किया था। सिटी बसों के रूप में संचालित इन बसों को 40 किमी के दायरे में चलाने की बात कही गई थी। इन बसों को स्थानीय रूटों पर ही चलाया जाना था, लेकिन वर्तमान में परिवहन निगम की मनमानी से इन बसों को प्रदेश भर में संचालित कर खटारा कर दिया गया है। कई खटारा सिटी बसें मंडलीय कार्यालय में खड़ी हैं।