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तुमड़िया डैम का जल स्तर घटा, नहरें सूखी

Tue, 03 Jan 2017 12:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, काशीपुर
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काशीपुर में स्थित तुमड़िया डैम - फोटो : अमर उजाला
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 पहाड़ों में बारिश नहीं होने का बड़ा असर तुमड़िया डैम में पड़ा है। पानी न मिलने से डैम का जलस्तर लगातार कम हो रहा है, जिससे डैम से जुड़ी सिंचाई नहरें सूख गई हैं। सिंचाई के लिए इन नहरों पर निर्भर यूपी और उत्तराखंड के किसानों के माथे पर बल पड़ गए हैं। हालत यह है कि 12 दिसंबर से अब तक डैम से सिंचाई नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है। पानी नहीं मिलने से हजारों हेक्टेयर भूमि में बोई गई रबी सहित अन्य फसलों पर संकट मंडरा रहा है। हैरत की बात है कि साल भर में यह दूसरा मौका  है, जब डैम सूखने की कगार में पहुंच चुका है। 
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तुमड़िया डैम का निर्माण वर्ष 1970 में किया गया था। डैम 20 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।  डैम से तुमड़िया मुख्य नहर, तुमड़िया एक्सटेंशन, बहल्ला में तुमड़िया डैम फीडर  से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है। डैम से मिलने वाले पानी से यूपी में  53,651 और उत्तराखंड में 22,921 हेक्टेयर जमीन में सिंचाई होती है। लेकिन इस बार मौसम की मार की असर डैम में पड़ा है। एक तो पहाड़ों में बारिश नहीं होने  से डैम को पानी नहीं मिल सका। बाकी कसर कोसी बैराज से पानी नहीं मिलने की वजह से पूरी हो गई। 


बैराज की जिस नहर से डैम तक पानी पहुंचता है, वहां  कई महीने से मरम्मत का काम चल रहा है। तुमड़िया डैम में तैनात जेई जगत सिंह बिष्ट ने बताया कि अंतिम बार 9 अक्तूबर को रामनगर से डैम में पानी छोड़ा गया था। बीते 12 दिसंबर को अंतिम बार डैम से सिंचाई नहरों को पानी दिया गया था। उधर डैम में पानी नहीं होने से यूएसनगर के साथ ही रामपुर,  मुरादाबाद और बिजनौर जिले के सैकड़ों किसानों के समक्ष सिंचाई का संकट गहरा रहा है। वर्तमान में किसानों ने खेतों में गेहूं के अलावा, मटर, चारा  और सब्जियां बो रखी हैं। किसानों के अनुसार यदि फसलों में समय से पानी नहीं लगाया तो उत्पादन पर प्रभाव पड़ेगा। 
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 सिंचाई के लिए तुमड़िया डैम में निर्भर यूपी और उत्तराखंड के किसान पानी  नहीं मिलने से परेशान हैं। वह सिंचाई के लिए नहरों में पानी छोड़ने की मांग  को लेकर सिंचाई विभाग के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। पानी नहीं मिलने पर फसल बर्बाद होने का रोना रो रहे हैं। विभागीय अधिकारी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। वह डैम में पानी आने पर पानी को नहरों में  छोड़ने की दिलासा दे रहे हैं। अधिशासी अभियंता राम सकल आर्य ने बताया कि रोजाना किसान खुद ऑफिस आकर या फोन कर नहरों में पानी छोड़ने की मांग कर रहे  हैं। 

सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता राम सकल आर्य ने बताया कि पानी नहीं मिलने से तुमड़िया डैम सूखने की ओर है। डैम का जलस्तर घटकर 825.60 फिट तक जा पहुंचा है। बीते साल दो जनवरी को  डैम का जलस्तर 840.50 फिट था। डैम को रामनगर से पानी देने के लिए बार-बार  उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। 15 दिन तक नहर में हो रहे मरम्मत का  काम रोककर पानी छोड़ने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि जब डैम में पानी ही नहीं  है तो नहरों के लिए पानी कहां से लाएं। 
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