किसानों की गन्ना बकाया पेमेंट का भुगतान न होने के कारण ट्रांसपोर्टरों ने भी चीनीमिल में गन्ना ढुलाई के लिए डाले जाने वाले टेंडर का बहिष्कार कर दिया है। उनका कहना है कि बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान होने के बाद ही टेंडर डाले जाएंगे। कहा कि किसान इस बार गन्ने की पेमेंट न होने के कारण अपना गन्ना सहकारी चीनी मिल को नहीं देंगे और प्राइवेट मिलो को देने का मन बना लिया है।
दि किसान सहकारी चीनी मिल में वर्ष 2016-17 के पेराई सत्र में गन्ना ट्रांसपोर्टेशन के लिए शनिवार को टेंडर पड़ना है। टेंडर प्रक्रिया से एक दिन पहले शुक्रवार को ट्रक यूनियन में अध्यक्ष लक्खा सिंह की अध्यक्षता में ट्रांसपोर्टरों की बैठक हुई। जिसमें ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि चीनीमिल पर किसानों का करोड़ों रुपये बकाया है।
जिसका भुगतान न होने से इस बार किसानों ने यूपी की प्राइवेट चीनी मिलो को गन्ना देने का मन बनाया है। बैठक में तय किया गया कि किसानों के बकाये गन्ना की पेमेंट का भुगतान होने के बाद ही टेंडर डाला जाएगा। उन्होंने शनिवार को पड़ने वाले टेंडर का बहिष्कार कर दिया। वहां सचिव हाजी शमशुलहक मलिक, कुलवंत सिंह काला, मौलाना आफताब खान, मलकीत सिंह हुंदल, जगदीश सिंह आदि थे।
मिल पर बकाया है 34.20 करोड़ रुपया
दि किसान सहकारी चीनीमिल पर दस हजार किसानों की 34.20 करोड़ रुपये की गन्ना पेमेंट बकाया है। इसको लेकर किसान कई बार आंदोलन भी कर चुके हैं। लेकिन, शासन से धन न मिलने के कारण मिल द्वारा अभी तक पेमेंट ही नहीं की गई। हालात ये हैं कि किसानों को उनकी बकाया पेमेंट न मिली तो इस बार शासन प्रशासन के लिए मिल चालू कराना मुश्किल हो जाएगा।
दि किसान सहकारी चीनीमिल को सितारगंज, खटीमा और चोरगलिया क्षेत्र के 12 हजार 110 किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं। वर्तमान में इन किसानों का मिल पर गत 30 दिसंबर से 26 फरवरी तक का मिल पर 34 करोड़ 20 लाख रुपये का बकाया है। जबकि, मिल के गोदाम में 25 करोड़ रुपये की 80 हजार क्विंटल चीनी का स्टॉक है। गन्ना मूल्य के बकाया भुगतान के लिए किसान पिछले छह माह से आंदोलन कर रहे हैं।
कभी गन्ना सोसायटी में तो कभी चीनीमिल और कभी प्रशासनिक कार्यालयों पर किसानों के धरना प्रदर्शन आयोजित हुए। लेकिन, आज तक किसानों को उनके बकाया मूल्य की पेमेंट नहीं मिली। किसानों को आश्वासन का झुनझुना थमाया जाता है। जिससे किसानों में मिल प्रशासन के खिलाफ रोष है।