नारी को हीन भावना से देखने वालों को अब सोच बदलनी होगी। पर्दे से निकलकर नारी कुछ कर गुजरने के लिए तैयार है और हर क्षेत्र में बराबर की भागीदारी कर रही है। बस, बहुत हो गया। अब छेड़छाड़ करने वाले शोहदों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम के तहत शनिवार को छात्राओं ने आत्मरक्षा, व्यक्तित्व निर्माण से लेकर हर पहलू पर खुलकर विचार रखे। आर्य कन्या इंटर कॉलेज में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में छात्राओं ने कहा कि 21 वीं सदी में भी अक्सर लड़कियां शोहदों को देखकर अपना रास्ता बदल देती हैं या फिर डर के कारण घर से निकलना बंद कर देती हैं।
लड़कियां हैं इसीलिए सब उनको कमजोर समझकर परेशान करते हैं। छात्राओं ने कहा, अब ज्यादती सहन नहीं होगी। शोहदों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। लड़कियों को सशक्त बनने के लिए मानसिक तौर पर खुद को तैयार करना होगा। छात्राओं ने सड़कों, बसों, ट्रेनों, टेंपो में यात्रा करते समय होने वाली छेड़छाड़ से बचाव के टिप्स भी सुझाए।इस मौके पर गुलसबा, मीनाक्षी, रूपाली, वंशिका, महक, मंतशा, अदीबा, तरन्नुम, संजना, प्रिया, इकरा इजामा, खुशी, निशा आदि ने विचार रखे।
नियंत्रण से लाख गुना बेहतर है अनुशासन
नियंत्रण का प्रभाव कुछ समय के लिए होता है, जबकि अनुशासन व्यक्ति में खुद से आता है। अनुशासित व्यक्ति ही ईश्वर की सबसे सुंदर कृति है। योग विवेक को बढ़ावा देता है और विवेक से हममें निर्णय लेने की क्षमता आती है। योग के प्रभाव से व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। - नमिता पंत, योग प्रशिक्षक
- महिलाएं उत्पीड़न के मामलों को दबा लेती हैं। ऐसा बिल्कुल भी न करे। इसका मौके पर ही जवाब दें। अन्याय के प्रति आपकी सहनशीलता अपराध को बढ़ावा देती है। - रिंकू, प्रधानाचार्या, आर्य कन्या इंटर कॉलेज।
- अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम से कॉलेज के बच्चों को आत्मरक्षा को लेकर प्रेरणा मिली है। इसमें छात्राओं को शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया गया है। - अनु चौहान, शिक्षिका।
- महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग रहे तो कोई भी उनका उत्पीड़न नहीं कर सकता। अपने अधिकारों का संरक्षण करते हुए परिवार को बांधे रखने की जिम्मेदारी भी उनकी है। - रीतू गुप्ता, शिक्षिका।