जिला चिकित्सालय में तीमारदारों के लिए बने रैन बसेरे में लटका ताला।
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जवाहर लाल नेहरू जिला चिकित्सालय तीमारदारों के लिए बनाया गया रैना बसेरा शोपीस बना हुआ है। तीमारदार रैन बसेरा में सोने के बजाय मरीजों के साथ बेड पर या बेड के नीचे सो रहे हैं। रैन बसेरे के संचालन का जिम्मा रेडक्रॉस सोसाइटी को दिया गया है। जिला अस्पताल की प्रबंधन समिति भी रैन बसेरे के व्यवस्थित संचालन को लेकर प्रयासरत नहीं है। इस्तेमाल नहीं होने पर अब रैन बसेरे में ताला लगा दिया गया है।
जिला अस्पताल में मार्च 2016 को रैन बसेरे का भव्य शुभारंभ हुआ था। अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों के तीमारदारों को रात्रि में सोने के लिए इसमें करीब 17 बेड की व्यवस्था की गई थी। निजी कंपनी के सौजन्य से बने इस रैन बसेरे में एक रात के किराये के रूप में तीमारदारों को 25 रुपये देने थे। रैन बसेरे के संचालन का जिम्मा रेडक्रॉस सोसाइटी को दिया गया है। लेकिन, तीमारदार इस रैन बसेरे का इस्तेमाल न करके मरीज के साथ ही बेड पर या बेड के नीचे सो रहे हैं। तीमारदारों के एक से अधिक होने पर अस्पताल की व्यवस्थाएं बिगड़ जाती हैं। जिला अस्पताल की प्रबंध समिति और रेड क्रॉस सोसाइटी के सदस्य भी रैन बसेरे के प्रति तीमारदारों को जागरूक नहीं कर पा रहे हैं। तीमारदारों को होटलों के महंगे खर्चे से बचाने के लिए बनाए गए रैन बसेरे में ताला लटक गया है। इस बारे में पीएमएस डॉ. अमिता उप्रेती से मोबाइल पर संपर्क नहीं हो सका। अस्पताल के प्रबंधक अजय वीर सिंह ने बताया कि प्रबंधन समिति रैन बसेरे के संचालन को दुरुस्त करने के लिए प्रयासरत है।
25 रुपये किराया देने में भी कतरा रहे हैं गरीब तीमारदार
रुद्रपुर। जिला अस्पताल में बनाए गए रैन बसेरे का इस्तेमाल न होने की एक वजह तीमारदारों की कमजोर आर्थिक स्थिति भी है। लेकिन, विभिन्न वार्डों में रात के समय कई तीमारदार होने से व्यवस्थाएं बिगड़ने की आशंका बनी रहती है। लोगों का कहना है कि प्रबंध समिति यदि रैन बसेरे के बारे में लोगों को बताए तो इसका इस्तेमाल हो सकता है।