मझोला। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित रघुलिया गांव में बाघ दिखने की घटनाएं सामने आने से किसानों को गन्ना छीलने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। इससे किसानों को गन्ना समिति से मिलीं गन्ने की पर्चियां भी कैंसिल हो रही है।
रघुलिया के ग्राम प्रधान प्रेम सिंह ने बताया कि जगजीत सिंह के घर के पास खेत में एक सप्ताह पूर्व एक बाघिन अपने बच्चों के साथ दिखाई दी थी। गांव में बाघ दिखने की कुछ और घटनाओं के चलते मजदूर सहमे हैं। बाघों के गन्ने के खेतों में छिपे होने की आशंका से मजदूर गन्ने छीलने व काटने का कार्य करने से मना कर रहे हैं।
ग्रामीण जगजीत सिंह ने बताया कि गन्ने की फसल तैयार है लेकिन बाघ के डर के मजदूर गन्ना काटने और छीलने के लिए नहीं आ रहे हैं। जिस कारण घर के ही लोग गन्ने की छिलाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि गन्ना समितियों से गन्ने की पर्ची मिलने के 72 घंटे के भीतर गन्ना देना पड़ता है लेकिन मजदूर न मिलने के कारण पर्चियां दो बार कैंसिल हो चुकी हैं। संवाद
कोट-
जंगलों से सटे गावों के किनारों पर वन विभाग की ओर से बाड़ लगाने के साथ ही गहरे खड्डे खोदने का कार्य होना चाहिए। यह मांग कई बार उठाई जा चुकी है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है। - गुरसेवक सिंह, जिलाध्यक्ष, भाकियू (टिकैत)
- वन विभाग को वनों से सटे गावों में गश्त बढ़ानी चाहिए। गश्त अधिक होने से वन्यजीव गांव में नहीं घुस पाएंगे, इससे कृषि कार्य सुविधाजनक हो पाएगा। - मनजिंदर सिंह भुल्लर, जिलाध्यक्ष, भाकियू (चढूनी)
रघुलिया गांव के जंगल के सटे होने के कारण बाघ पानी की तलाश में नालों के पास जा सकता है लेकिन बाघ के गन्ने के खेत में छुपने की सूचना नहीं मिली है। क्षेत्र में वन कर्मचारी लगातार गश्त कर रहे हैं। - राजेंद्र सिंह मनराल, वन क्षेत्राधिकारी सुरई रेंज