काशीपुर। बाइक चोरी के दो अलग-अलग मुकदमों में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/ सिविल जज (सि.डि.) की अदालत ने आरोपी पिता पुत्र को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने तीसरे आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
13 जनवरी 2012 को मडैया, महुआखेड़ागंज निवासी खलील अहमद ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह सिद्दीकी मार्केट स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ने आया था। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने उसकी बाइक चोरी कर ली। उधर, 15 अप्रैल 2012 को इसरार अली ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह एक विवाह समारोह में शिरकत करने कविनगर स्थित कलश मंडप में गया था। वहां से उसकी मोटर साइकिल चोरी हो गई। पुलिस ने 27 मई 2012 को चोरी गई दोनों बाइकें बरामद कर थाना कुंडा के ग्राम सरवरखेड़ा निवासी मेहमूद हसन और उसके पुत्र अयाज अहमद को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पिता-पुत्र ने बताया कि उन्होंने दोनो बाइकें सरवरखेड़ा के इमामुद्दीन के साथ मिलकर चोरी की थी। पुलिस ने इमामुद्दीन को भी गिरफ्तार कर लिया था। तीनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। वादी पक्ष की ओर से बाइकों के स्वामियों के अलावा पुलिस कर्मियों को परीक्षित कराया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी सहायक अभियोजन अधिकारी अनुज कुमार साहनी ने की। दोनों मुकदमों में पत्रावली का अवलोकन कर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/ सिविल जज (सि.डि) विनोद कुमार वर्मन ने महमूद व उसके पुत्र अयाज को धारा 411 के तहत दोषी पाया। जबकि इमामुद्दीन को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने आरोपी पिता-पुत्र को दोनों मुकदमों में तीन-तीन वर्ष के कारावास व एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।