पांच साल पहले सिडकुल फेज-टू के विस्तार के लिए सवा तीन सौ करोड़ रुपये खर्च किए तो गए लेकिन विकास यहां से कोसों दूर है। जिन सात उद्योगों ने जमीन खरीदी, उनमें से एक ने ही अभी तक कंपनी लगाई। फेज-टू के हालात देखकर तो यही लगता है कि यहां उद्योग लगें या न लगें सिडकुल को फर्क नहीं पड़ता। सिडकुल ने अपने ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए ढांचा तैयार कर काम की इतिश्री कर ली। सड़कें खराब हो रही हैं, नाले जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हैं। ट्रांसपोर्ट हब भी खाली पड़ा है।
2012 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद जुलाई में उपचुनाव के बाद यहां से विधायक बने सीएम विजय बहुगुणा ने क्षेत्र को सिडकुल के फेज-टू की सौगात दी। संपूर्णानंद शिविर खुली जेल की करीब 1700 एकड़ भूमि पर औद्योगिक विकास क्षेत्र सिडकुल फेज-टू की स्थापना की गई। बहुगुणा ने 25 अक्तूबर 2012 को इसका शिलान्यास किया। जिसके बाद सिडकुल ने लगभग सवा तीन सौ करोड़ रुपये ठिकाने लगाने के लिए फेज-टू की जमीन में करीब 22 किमी. लंबी सड़कें, नाले, 12 एकड़ भूमि में ट्रांसपोर्ट हब, सीवर व वाटर लाइनें और तीन गेट का निर्माण किया।
वर्ष 2013 में सबसे पहले गोल्डन इन्फ्राकॉन ने फेज टू में उद्योग लगाने के लिए 75 एकड़ का प्लॉट खरीदा। उसके बाद 2014 में डीएस ग्रुप ने 270 एकड़ भूमि ली। वर्ष 2015 में पारले एग्रो इंडस्ट्रीज ने 12 एकड़, उसके अगले साल चीन की यो-यो गो कंपनी ने 27 एकड़, एसडी पॉलीटेक ने 22 एकड़, सेठियो टेक्सटाइल ने 15 एकड़ जमीन खरीदी। इसके अलावा लघु उद्योग रचना हेचरी ने भी 1200 वर्गमीटर का प्लॉट लिया। पारले एग्रो ने तो कंपनी लगाकर उत्पादन शुरू कर दिया, लेकिन डीएस ग्रुप और गोल्डन इन्फ्राकॉन जैसी बढ़ी कंपनियों ने तो यहां उद्योग लगाने से ही मना कर दिया।
फेज-टू को विकसित करने के लिए निर्माण तो जमकर किया गया लेकिन उद्योगों को स्थापित करने के लिए न ही सरकार और न ही सिडकुल के आला अफसरों ने कोई पैरवी की। सिडकुल के क्षेत्रीय प्रबंधक को भी यहां से हटाकर रुद्रपुर के क्षेत्रीय प्रबंधक को यहां का कार्यभार दिया गया। सड़कों की हालत दयनीय हो रही है। किनारों पर घास उग आई है। नाले क्षतिग्रस्त हो गए हैं, लेकिन फेज-टू का सुधलेवा कोई नहीं है। उद्योगपति आते भी हैं तो अधिकारियों के न होने से उन्हें बैरंग लौटना पड़ता है। इस संबंध में सिडकुल के अधिकारियों से जानकारी चाही तो उन्होंने चुप्पी साध रखी है।
प्लाटों की मिट्टी से ही सड़क कर दी ऊंची
सिडकुल फेज-टू में बनाई गई सड़कें ऊंची और प्लाट नीचे हैं। सिडकुल द्वारा कार्यदायी कंपनियों से जब सड़कों का निर्माण कराया गया तो कंपनियों ने सड़कों के किनारे बने उद्योगों के प्लाटों से ही मिट्टी खोदकर सड़क में डाली। प्लाटों से मिट्टी खुदने के कारण करीब चार से पांच फुट सड़कें ऊंची हो गई हैं और प्लाट तालाब बने हुए हैं। डीएस ग्रुप ने प्लाटों की हालत देखकर ही यहां उद्योग लगाने से मना कर दिया। डीएस ग्रुप के अधिकारियों का कहना है कि जितना खर्च उद्योग लगाने में होगा, उससे अधिक तो मिट्टी भरान में हो रहा है।