जसपुर। रमजान का मगफिरत वाला दूसरा अशरा मंगलवार शाम मगरिब की नमाज के बाद शुरू हो गगा। इस अशरे में अल्लाह अपने बंदों की मगफिरत फरमाता है। तौबा करने वालों के गुनाह माफ कर दिए जाते हैं।
मुफती-ए-शहर शमीम अख्तर सअदी ने बताया कि रमजान माह को दस-दस दिनों के तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा रहमत, दूसरा मगफिरत और आखिरी अशरा जहन्नम से निजात का है। रमजान के पहले 10 दिनी अशरे को हमने पा लिया है।
मंगलवार को मगरिब की नमाज के बाद दूसरा अशरा शुरू हो गगा। इसको मगफिरत वाला अशरा भी कहा जाता है। इसमें मुसलमानों को मगफिरत की दुआ करनी चाहिए। इफ्तार के वक्त की गई दुआ अल्लाह को अधिक पसंद हैं और इसे कबूल भी करता है। वहां मौलाना सैयद शाने आलम, मौलाना शुएब आलम आदि थे।