स्टेट बैंक आफ इंडिया की देहरादून की नेश्विला रोड स्थित शाखा में एक जनवरी 2017 को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी का खाता संख्या 36404121330 खोला गया। इसका संचालन व्यक्ति विशेष (सीएम के ओएसडी) द्वारा किया गया, जिस पर अब कई पहलुओं से जांच की जा रही है।
नियमावली के अनुसार किसी भी राष्ट्रीय पार्टी के खाते में लेनदेन का अधिकारी पार्टी के कोषाध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष द्वारा ही किया जाता है, लेकिन इसमें जो भी संचालन हुआ है वह एक व्यक्ति विशेष के द्वारा किया जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। खास बात यह है कि अब इस मामले की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। मतगणना के बाद इस मामले में किस स्तर पर घालमेल हुआ है, इसकी भी कुमाऊं कमिश्नर जांच करेंगे।
बैंक सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय पार्टी के नाम से खोले गए खाते का संचालन पार्टी के ही पदाधिकारियों द्वारा किया जाना होता है, ऐसे में किस आधार पर इसमें संचालन किसी व्यक्ति विशेष को दिया गया है। इसकी जांच शुरू होने लगी है। इसमें खास बात यह है कि एनएच-74 के चौड़ीकरण में हुए गड़बड़झाले के तार अब सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के ओएसडी से जुड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। एक जनवरी 2017 को खोले गए खाते में करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ है।
बैंक सूत्रों का कहना है कि खाते का संचालन कमल सिंह रावत के नाम से हो रहा है, जो मुख्यमंत्री के ओएसडी बताए जा रहे हैं। इस मामले में राम नारायण नाम के व्यक्ति ने एक याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की है, उसमें इस बैंक खाते को आधार बनाया गया है।
बुधवार को ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर शहर में आयकर विभाग की छापेमारी भी इसी आधार पर हुई है। जसपुर से सितारगंज तक सड़क चौड़ीकरण के किए किसानों को जो मुआवजा दिया गया है। उसमें करीब 118 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।
कुमाऊं कमिश्नर ने इसकी पुष्टि पहले ही मीडिया के समक्ष कर दी थी। इस खाते में उद्योगपतियों के साथ किसानों की भी मोटी रकम जमा कराई गई है। धनराशि जमा करवाने वाले ज्यादातर किसान काशीपुर से लेकर किच्छा और सितारगंज के पाए गए हैं।