काशीपुर। चुनाव में उम्मीदवार और उनके समर्थक जाने-अनजाने कई गंभीर अपराध करते हैं। इसके लिए उन्हें जेल की सजा तक हो सकती है। साथ ही उन्हें चुनाव लड़ने और वोट डालने तक के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है। ऐसे अपराधों का मुकदमा चुनावों में मतदान करने व परिणाम घोषित होने के बाद भी दर्ज कराया जा सकता है।
चुनाव संबंधी कानून सहित 45 किताबों के लेखक व एडवोकेट नदीमउद्दीन ने बताया कि एक जुलाई 2024 में लागू भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के अंतर्गत धर्म, जाति, क्षेत्र भाषा आदि के आधार पर नफरत फैलाने पर तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है। पूजा के स्थान या धर्मस्थल में यह अपराध करने पर पांच वर्ष तक की सजा हो सकती है।
चुनाव में प्रभाव डालने के लिए इस तरह का अपराध करने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 के अंतर्गत तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है। चुनाव के समय यह अपराध छह वर्ष तक की सजा दिला सकता है।