काशीपुर। उत्तराखंड की जेल में कैदियों का दबाव बढ़ रहा है। प्रदेश में 3461 कैदियों की क्षमता वालीं सामान्य जेलों में 6603 कैदी हैं, जो कि लगभग दोगुनी संख्या है। जिला कारागार अल्मोड़ा और उप कारागार हल्द्वानी में कैदियों का सबसे अधिक दबाव है। यहां क्षमता से तीन गुना अधिक कैदी हैं। नैनीताल, रूड़की, हरिद्वार और केंद्रीय कारागार सितारगंज में करीब-करीब दोगुने कैदी हैं।
आरटीआई कार्यकर्ता नदीमउद्दीन ने महानिरीक्षक कारागार (कारागार मुख्यालय) उत्तराखंड से राज्य की जेलों में बंदियों की क्षमता और वर्तमान में बंद कैदियों की संख्या के संबंध में सूचना मांगी थी। मुख्यालय कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग उत्तराखंड के लोक सूचना अधिकारी /प्रशासनिक अधिकारी मनोज खोलिया की ओर से बीते दिनों उपलब्ध कराए विवरण पर गौर करें तो संपूर्णानंद शिविर जेल सितारगंज (खुली जेल) और जिला कारागार चमोली को छोड़ सभी जेलों में क्षमता से अधिक कैदी हैं।
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क्षमता से अधिक कैदियों वालीं जेल
जेल - क्षमता - कैदी हैं
जिला कारागार अल्मोड़ा - 102 - 354
उप कारागार हल्द्वानी - 555 - 1502
जिला कारागार देहरादून - 580 - 1499
जिला कारागार नैनीताल - 71 - 170
रूड़की उप कारागार - 244 - 439
जिला कारागार हरिद्वार - 888 - 1340
केंद्रीय कारागार सितारगंज - 552 - 805
जिला कारागार टिहरी - 150 - 198
जिला कारागार पौड़ी - 150 - 168
केवल दो जेल में स्वीकृत क्षमता से कम कैदी
उपलब्ध सूचना के अनुसार प्रदेश में केवल दो जेल ही ऐसी है, जिसमें स्वीकृत क्षमता से कम कैदी बंद है। इसमें एक विशेष जेल संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) सितारगंज है। इसमें केवल सजायाफ्ता कैदियों को ही रखा गया है। इसकी क्षमता 300 कैदियों की है और इसमें मात्र 48 कैदी हैं। इसके अतिरिक्त सामान्य जेलों में स्वीकृत क्षमता से कम कैदियों वाली एकमात्र जेल जिला कारागार चमोली है। इसमें उसकी क्षमता 169 की अपेक्षा 128 कैदी ही बंद हैं।