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देश के विभाजन के दर्द को भुलाया नहीं जा सकता: धामी

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केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री को बुके देते विधायक शिव अरोरा व उपस्थित लोग। - फोटो : RUDRAPUR
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रुद्रपुर। देश विभाजन के दर्द को भुलाया नहीं जा सकता है। यह बात कहते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभाजन की विभीषिका में अपने प्राण गंवाने वाले, विस्थापन का दर्द झेलने वाले लाखों सेनानियों को शत-शत नमन एवं प्रणाम किया। इस दौरान उन्होंने बंटवारे के दौरान मारे गए 10 लाख से भी अधिक लोगों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया। देश विभाजन के बाद पाकिस्तान छोड़ने का फैसला करने वाले बुजुर्गों को सम्मानित भी किया गया।
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विभाजन विभीषिका दिवस पर उत्तरांचल पंजाबी महासभा की ओर गंगापुर रोड स्थित जेसीज पब्लिक स्कूल में रविवार सुबह 10 बजे आयोजित कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम समेत जलियावाला बाग हत्याकांड का मंचन भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभाजन के समय घर, जमीन जायदाद व परिवार को छोड़कर हिंदुस्तान पहुंचे लगभग 400 बुजुर्गों को पटका, मुकुट पहनाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रत्येक वर्ष राज्य में विभाजन विभीषिका दिवस आयोजित करने की घोषणा की।
उन्होंने कहा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से विभाजन विभीषिका दिवस मनाए जाने की घोषणा की थी, यह दिवस उन सभी सेनानियों एवं विभाजन के दौरान अपने परिजनों से बिछड़े लोगों के बलिदान को याद करने का दिवस है। उन्होंने बताया हाल ही में हुई मुख्यमंत्रियों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी मुख्यमंत्रियों को विभाजन की विभीषिका दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम किए जाने एवं विभाजन के दौरान मौजूद लोगों से बात करने का आग्रह किया था।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभाजन विभीषिका के दौरान हुए नरसंहार को 20वीं सदी का सबसे बड़ा नरसंहार बताया। उन्होंने कहा विभाजन विभीषिका में लंबे संघर्ष के बावजूद लोगों ने अपने वजूद को बचाया और समाज के विकास में अहम योगदान दिया। उन्होंने कहा विभाजन विभीषिका की पीड़ा सह चुके लोगों ने उत्तराखंड के तराई क्षेत्र को बसाने में अहम योगदान दिया। आज भी ये लोग उत्तराखंड के विकास में अपना अहम योगदान दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा की आज हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे है। जल्द ही हम अमृत काल में प्रवेश करेंगे, ये काल भारत का स्वर्णिम काल होगा। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने भी यह संकल्प लिया है कि जब हमारा राज्य 25वें साल में प्रवेश करेगा, तब हमारा प्रदेश देश का श्रेष्ठ राज्य होगा। इसके लिए हम सरलीकरण, समाधान और निस्तारण के मंत्र पर काम कर रहे हैं। उत्तरांचल पंजाबी महासभा के युवा प्रदेश अध्यक्ष भारत भूषण चुघ ने विभाजन विभीषिका दिवस के सफल आयोजन के लिए प्रधानमंत्री मोदी, सीएम पुष्कर सिंह धामी, विधायक शिव अरोरा व सभी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम में ये भी रहे मौजूद
विधायक अरविंद पाण्डे, प्रदीप बत्रा, सरिता कपूर, मेयर रामपाल सिंह, पूर्व सांसद बलराज पासी, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, ललित मिगलानी, पंजाबी महासभा के प्रदेश प्रवक्ता आशीष छाबड़ा, पूर्व जिलाध्यक्ष उत्तम दत्ता, जिलाधिकारी युगल किशोर पन्त, एसएसपी मंजूनाथ टीसी, अपर जिलाधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, जय भारत सिंह, पंजाबी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव घई, हरबंश चुघ, भारत भूषण चुघ, दिवाकर पांडे, सुरजीत सिंह ग्रोवर।
हर कोई देख सकेगा गोल्डन टेम्पल
रुद्रपुर। सीएम धामी ने कहा कि केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने यहां से अमृतसर तक ट्रेन चलाने के लिए संसद में बात उठा दी है। जल्द ही यहां से अमृतसर के लिए ट्रेन चलेगी। आने वाले समय में रुद्रपुर व रामपुर में बाईपास बनाया जाएगा। काशीपुर से मुरादाबाद जाने के लिए फोरलेन हाईवे बनेगा। देहरादून जाने के लिए एक घंटे का कम समय लगेगा, जसपुर से सीधे अफजलगढ़ व अफजलगढ़ से सीधे नजीमाबाद जाने का रास्ता बनेगा। सिंगल विंडो सिस्टम से उद्योगों को रफ्तार मिलेगी। संवाद
डाक्यूमेंटरी देख कर लोगों की आंखों में आ गए आंसू
विभाजन के समय बेघर हुए लोगों की विभीषिका पर आधारित एक डॉक्यूूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया। पाकिस्तान छोड़कर देश लौटे लोगों को जो यातनाएं झेलनी पड़ी, उसे देखकर लोगों की आंखो में आंसू आ गए।
देश के निर्माण में भूमिका निभा रहे विभाजन विभीषिका सेनानी
15 अगस्त 1947 की आजादी से पहले 14 अगस्त को देश ने बहुत कुछ खोया और करीब एक करोड़ लोग घर से बेघर हो गए। अपनी, इज्जत-आबरू, जान बचाने के लिए दर-दर भटकने के लिए मजबूर हुए। विभाजन के दौरान प्राणों की आहुति देने वाले 10 लाख लोगों का तर्पण तक नहीं हो पाया था, प्रधानमंत्री की सोच के कारण आज उनका तर्पण हुआ है। उस समय का कांग्रेस नेतृत्व कट्टर दंगाइयों के आगे झुुक गया, इसी कारण बंटवारा हुआ।
- शिव अरोरा, क्षेत्रीय विधायक एवं कार्यक्रम संयोजक
मानवता के दुश्मन कट्टरपंथियों से मानवता एवं धर्म की रक्षा करने वाले विभाजन विभीषिका सेनानियों को नमन करते हैं। ये सेनानी वास्तव में हमारे और आने वाली पीढ़ियों को लिए रोल मोडल हैं, जिन्होंने अपना सब कुछ खोकर भी बिना किसी के आगे हाथ फैलाए, अपनी हिम्मत के बल पर स्वयं को खड़ा किया। आज देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मैं प्रयासरत हूं कि काठगोदाम से अमृतसर तक रेल संचालन शीघ्र शुरू किया जाए।
- अजय भट्ट, केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्यमंत्री
हमारा देश आजाद तो हुआ, लेकिन देश को आजादी की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। विस्थापन एवं विभाजन के दर्द को भुलाकर देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विभाजन का दर्द झेलने वाले सभी व्यक्तियों को नमन है। एक मैगजीन के सर्वे के आधार पर देश के टॉप मुख्यमंत्रियों की सूची में शामिल होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को बधाई।
- गणेश जोशी, सैनिक कल्याण एवं जिला प्रभारी मंत्री
आज भी याद है खौफनाक मंजर
रुद्रपुर। वर्ष 1947 में विभाजन के दौरान बचपन में पाकिस्तान से हिंदुस्तान पहुंचे लोगों को बुजुर्ग होने तक वह खौफनाक मंजर याद है। विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस सम्मान समारोह कार्यक्रम में पहुंचे बुजुर्गों को सीएम धामी ने सम्मानित किया। बुजुर्गों ने कहा कि कोई पाकिस्तान से पैदल चलकर दिल्ली पहुंचा तो किसी ने अपने सामने ट्रेन में लोगों को मरते हुए देखा था।
18 साल की उम्र में लाहौर से हिंदुस्तान पहुंचे। खटीमा के पुरनापुर में रहकर फिर ग्राम प्रधान बना। 200 गरीबों को रहने के लिए प्रतापपुर में जमीन दान कर दी है।
-बख्शीश सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान, खटीमा।
पाकिस्तान से 10 साल की उम्र में हिंदुस्तान पहुंचा था। अपने सामने ट्रेन में लोगों को मरता हुआ देखा। आज भी विभाजन का वह मंजर दिमाग से नहीं निकलता।
- मुल्खराज गुलाटी, रुद्रपुर।
आठ साल की उम्र में मां के साथ लाहौर से दिल्ली पैदल पहुंचा था। उस समय हर तरफ लोग इधर से उधर अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे।
- सुरेंद्र त्रेहान, रुद्रपुर।
पठान मित्र ने मां और बहनों को बुर्का पहनाकर हवाई जहाज से भारत भेज दिया था। मैं पैदल चलकर भारत आया। खाने पीने को कुछ नहीं मिला था।
- वेद प्रकाश, देहरादून।
साढ़े सात साल की उम्र में पाकिस्तान से अपनी चार बहनों व माता पिता के साथ हिंदुस्तान पहुंचा। आज भी विभाजन का वह दिन भुलाने से भी नहीं भूलता।
- हरवंश लाल, हल्द्वानी।
13 साल की उम्र में पाकिस्तान के डेरा स्माइल खान से अपनी दो माताओं व भाई के साथ हिंदुस्तान पहुंचा। जंगलों के रास्तों से पहुंचकर जैसे तैसे हिंदुस्तान पहुंचे।
- रेवत लाल अरोड़ा, हरिद्वार।

विभीषिका में मारे गए लोगों के लिए अरदास करते सीएम पुष्कर सिंह धामी, कृषि मंत्री गणेश जोशी, विधायक ?- फोटो : RUDRAPUR

विभीषिका सेनानी को सम्मानित करते सीएम पीएस धामी व विधायक शिव अरोरा।- फोटो : RUDRAPUR

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