हरित क्रांति की जननी गोविंद बल्लभ पंत विश्वविद्यालय में 97वां चार दिवसीय अखिल भारतीय किसान मेला और कृषि उद्योग प्रदर्शनी का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। मेले में प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के किसान भी शामिल हुए। इस दौरान विभिन्न सरकारी कृषि स्टालों पर खरीफ की फसलों, कृषि यंत्रों, नवीन शोध, उन्नत बीज और कम लागत में किसानों को ज्यादा लाभ पहुंचाने की विधि बताई गई।
शुक्रवार को विश्वविद्यालय गांधी हाल में कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विवि के कुलपति प्रोफेसर एचएस धामी ने किया। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा यहां के अध्यापकों, कर्मचारियों और उनके शोध कार्यों से है। विवि हरित क्रांति की जननी रहा है। पंतनगर विवि ने वर्षों से अपनी एक अलग पहचान कायम रखी है। इस कारण विवि का प्रयास रहता है कि किसानों को प्रत्येक वर्ष मेला लगाकर लाभान्वित किया जाए। कहा कि किसान देश क रीढ़ हैं। कहा कि अन्नदाता देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। विवि प्रबंध परिषद की सदस्य प्रेमलता सिंह ने कहा कि देश में अन्य स्थानों पर कृषि विवि स्थापित हो चुके हैं, लेकिन पंतनगर विवि की अपनी अलग पहचान है। विशिष्ट अतिथि राजेंद्र पाल सिंह ने कहा कि कुछ दिन पहले विवि में स्थाई कुलपति की व्यवस्था नहीं थी। फिर भी विवि में महत्वपूर्ण शोध व किसानों के हित के कार्य होत रहे है। प्रोफेसर प्रभात डबास ने किसान मेले की उपयोगिता और आयोजन के उद्देश्यों के बारे में बताया। इस मौके पर डा. जेपी सिंह, डा. जे कुमार, डा. सी तिवारी, केएमवीएन अध्यक्ष किरण मंडल, किसान विकास क्लब अध्यक्ष अरुण शर्मा आदि मौजूद थे।