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मेयर ने इस्तीफा देने की कोशिश की: समर्थकों ने गाड़ी के आगे लेटकर रोका, इस वजह से दीपक बाली ने लिया था फैसला

Sat, 07 Jun 2025 01:57 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, ऊधम सिंह नगर

सार

पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा के बयान से आहत होकर मेयर दीपक बाली पद से इस्तीफा देने के लिए नगर निगम कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उन्हें रोकने के लिए कुछ लोग गाड़ी के आगे लेट गए। मेयर ने कही मुझे ये लोग विकास करने से रोक रहे हैं।
 
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मेयर दीपक बाली - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा के बयान से आहत होकर मेयर दीपक बाली पद से इस्तीफा देने के लिए नगर निगम कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उन्हें रोकने के लिए कुछ लोग गाड़ी के आगे लेट गए। साथ ही इस्तीफा नहीं देने देंगे के नारों के साथ उन्हें रोकने का प्रयास किया। मेयर बाली ने निगम सभागार में कहा कि मैं सिर्फ विकास करने के लिए राजनीति में आया हूं। मुझे ये लोग विकास करने से रोक रहे हैं।

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नगर निगम कार्यालय में शनिवार दोपहर महापौर दीपक बाली अपने पद से इस्तीफा देने पहुंचे। कार्यालय के बार पहले से जमा भीड़ ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। कुछ लोग गाड़ी के आगे लेट गए, इसके बाद मेयर पैदल ही कार्यालय की तरफ बढ़ने लगे। वहां बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष, विभिन्न संगठन के सदस्य मौजूद थे। इसके बाद मेयर बाली निगम सभागार में पहुंचे। वहां उन्होंने जनता से माफी मांगते हुए कहा कि मैं तो विकास करने आया था, आप लोग बताइए मुझसे क्या गलती हो गई। मुझे कुछ लोग कार्य करने नहीं देना चाहते। ऐसे में मेरा इस्तीफा देकर चुप चाप बैठ जाना ही बेहतर होगा। इसपर सभागार में नारेबाजी होने लगी और लोगों ने इस्तीफे से इंकार किया। वहीं पार्षदों ने कहा कि अगर आप इस्तीफा देंगे तो हम पार्षद भी इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद उन्होंने अपने फैसले को वापस ले लिया। 

दरअसल, बीते बुधवार को पूर्व विधायक हरभजन सिंह चीमा ने विधायक कार्यालय में प्रेसवार्ता कर मेयर बाली पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने चौराहों के नाम बदलने समेत संगठन को साथ लेकर नहीं चलने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि मेरी जानकारी में आया है कि नगर निगम के अध्यक्ष ने काशीपुर के लंबे समय से नामित चौराहों के नाम बदलने का निर्णय लेते हुए संबंधित चौराहों का निरीक्षण करने के लिए संबंधित विभागों की मीटिंग बुलाई थी। इसके लिए उन्होंने स्वयं सौंदर्यीकरण के प्रति और चौराहों के नामों के प्रति अधिकारियों को निर्देशित किया है। इससे काशीपुर की जनता में भारी रोष है। किसी भी स्थान के पुरातन नाम उस शहर की पहचान होते हैं। चौराहों का नाम बदलना काशीपुर की पहचान बदलने के बराबर है।
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पूर्व विधायक चीमा ने कहा कि मैं 20 साल तक विधायक रहा। सभी मिलजुल कर विकास की एक-दूसरे को सूचना देकर कार्य करते थे। आज विधायक को नगर निगम के अध्यक्ष ने अपने सारे कार्यकलापों में इस तरीके से बाहर कर दिया जैसे दूध में से मक्खी निकाल दी जाती है। विधायक और नगर निगम के अध्यक्ष का कोई आपस में तालमेल नहीं है। मीटिंग में मेयर को विधायक को बुलाना चाहिए लेकिन वह नहीं बुला रहे हैं। वहीं नगर निगम का अध्यक्ष हो या विधायक अगर कोई भी अपने कार्य क्षेत्र के बाहर और नियमानुसार कार्य न कर रहा हो, तो अफसरों को बताना चाहिए कि यह कार्य आपके अधिकार क्षेत्र से बाहर है इसमें हस्तक्षेप न करें।

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