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पुलिस की सूझबूझ से सधा मामला, नहीं तो दोहराता कालाढूंगी कांड

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रुद्रपुर। कुंडा कांड के दौरान भड़के भारतपुर वासियों पर काबू पाना अपने आप में बड़ी बात थी। पुलिस की सूझबूझ से मामला काफी शांति से सध गया नहीं तो शायद प्रदेश के अंदर एक बार फिर से 13 वर्ष पुराना कालाढूंगी की पुनरावृत्ति हो सकती थी। अब वायरल हो रहे वीडियो भी गुरताज के बयानों को गलत ठहरा रहे हैं।
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कुंडा कांड के दौरान उप ज्येष्ठ प्रमुख की पत्नी की हत्या हो जाने के बाद भरतपुर गांव के अंदर लोगों का मजमा लग गया था। साथ ही सैकड़ों लोग आक्रोशित होकर प्रदर्शन करने लगे थे। इसके अलावा ग्रामीणों ने हाईवे भी जाम कर दिया था। सूचना पर जिले भर की पुलिस के साथ डीआईजी नीलेश आनंद भरणे, हल्द्वानी एसपी सिटी हरबंश सिंह भी पहुंचे थे। तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन में पुलिस ने काफी सूझबूझ दिखाई।
यदि उत्तराखंड पुलिस इस मामले में जरा भी आक्रोशित हो जाती तो एक बार फिर कालाढूंगी कांड जैसा कुछ दोहराता। वर्ष 2009 में कालाढूंगी कांड के दौरान कोटाबाग के ब्लॉक प्रमुख बलवंत सिंह कन्याल की थाने के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। ब्लॉक प्रमुख की हत्या से आक्रोशित लोगों ने अगले दिन कालाढूंगी थाने में आग लगा दी थी।
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इस दौरान सभी पुलिस कर्मी थाना छोड़कर भाग गए थे जबकि भीड़ में फंसने से एक सिपाही की मौत हो गई थी। वहीं कुंडा में भी कालाढूंगी कांड जैसा कुछ हो जाता यदि पुलिस सूझबूझ से काम नहीं लेती। अब तो वायरल वीडियो भी गुरताज के बयानों को गलत ठहरा रहे हैं। यदि उस दौरान पुलिस समझदारी न दिखाती तो कई निर्दोष भी भीड़ का शिकार होते। संवाद
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