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बैंकों में हुआ कैश का संकट, एटीएम भी बने रहे खाली डब्बे

Tue, 06 Dec 2016 01:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रुद्रपुर।
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जिले में नोट की कमी जारी - फोटो : अमर उजाला
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रुद्रपुर। नोटबंदी के 27 दिन बाद भी बैंकों में कैश की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो सकी है, पहले जहां उपभोक्ता बैंक और एटीएम में कम रकम मिलने से परेशान थे, वहीं अब बैंकों और एटीएम में कैश के पूरी तरह खत्म हो जाने की दिक्कत ने लोगों की परेशानियों को बढ़ा दिया है, जिससे उपभोक्ताओं के कई जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। 
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सोमवार का दिन भी शहर के लोगों को नोटबंदी की मार से नहीं उबार पाया, हजारों की संख्या में कई लोग सुबह सवेरे ही बैंकों में कैश लेने और एटीएम से कैश निकालने के लिए लंबी  कतारों में खड़े हो गए लेकिन हालात यह थे कि 12 बजे तक बैंकों में कैश ही खत्म हो गया जिसके चलते कई एटीएम में भी कैश नहीं डल पाया जिससे उपभोक्ताओं को सिर्फ निराशा मिली, पंजाब नेशनल बैंक के ब्रांच मैनेजर रमेश थांगी ने बताया कि बैंक को रोजाना 70 से 80 लाख के कैश की जरूरत होती है लेकिन सोमवार को मात्र चार लाख का कैश ही मिल पाया जो बैंक में आने वाले उपभोक्ताओं को दो-दो हजार रुपए का नोट थमाया गया।

कैश के कम होने के कारण एटीएम में भी पैसा नहीं डाल पाए। थांगी ने बताया कि बैंक के कर्मचारियों को कैश लेने के लिए आरबीआई की कानपुर शाखा में भेजा गया है। मंगलवार तक कैश पहुंचने की संभावना है। कैश न होने से कई उपभोक्ता घंटों लाइन में लगे रहे लेकिन कैश खत्म होने से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। मंगलवार को भी उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद कम ही है।
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रुद्रपुर।  डिस्ट्रिक्टकोऑपरेटिव बैंक (डीसीबी) से संचालित सहकारी समिति से जुड़े किसानों को भी अब ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा का लाभ मिलेगा, इसके लिए बैंक ने जिलेभर की सहकारी समितियों को ऑनलाइन करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं, नाबार्ड की योजना के प्रारंभिक चरण में रुद्रपुर की बगवाड़ा, गदरपुर सहकारी समिति का चयन किया गया है। समितियों के ऑनलाइन होने से जिले के 65 हजार किसान लाभान्वित होंगे। 

ऊधमसिंह नगर जिले में डीसीबी से संचालित होने वाली 35 सहकारी समितियों में 65 हजार किसान खाताधारक हैं जो सीजन के समय कटाई, बुआई के लिए समितियों से लोन लेते हैं, लेकिन समितियों के ऑफलाइन मोड में काम करने से किसान खाताधारकों को एटीएम, चेक बुक की सुविधा नहीं मिलती।

 जिससे किसान अन्य बैंकों से लेनदेन नहीं कर पाते, नोटबंदी के बाद यही सबसे बड़ी वजह बनी कि किसान समितियों में खुले अपने खातों में जमा रकम का भी उपयोग नहीं कर सके, लेकिन अब इस तरह की दिक्कतों से किसानों को जल्द राहत मिलने के आसार हैं, नाबार्ड की योजना के तहत डीसीबी जिलेभर की सभी सहकारी समितियों को ऑनलाइन करने की तैयारियों में जुट गया है। समितियों के ऑनलाइन होने से खाताधारक किसानों को एटीएम, चेकबुक की सुविधा मिलेगी, जिनसे वह अन्य बैंकों और उनके एटीएम से भी लेनदेन सुचारु कर सकते हैं।


रुद्रपुर। नाबार्ड द्वारा सहकारी समितियों को ऑनलाइन करने की योजना पर अगर समय रहते काम हो गया होता तो किसान नोटबंदी के बाद भी सहकारी समितियों से लिए गए लोन को समय पर चुका सकते थे, सूत्रों के अनुसार एक माह पहले ही नाबार्ड ने उक्त योजना के लिए बैंकों को निर्देशित कर दिया था लेकिन योजना के क्रियान्वयन के लिए एजेंसी का चयन न होने पर देरी हो गई।

जिले की 35 सहकारी समितियों से 65 हजार किसानों को 360 करोड़ का लोन दिलाया गया है, जिसमें से नोटबंदी से पहले मात्र 90 करोड़ की ही वसूली हो सकी है। नोटबंदी के चलते बाकी की वसूली पर विराम लग गया, जिसका खामियाजा बैंक के साथ ही किसान भी भुगत रहे हैं।

रुद्रपुर। केंद्र सरकार द्वारा लिए गए नोटबंदी के फैसले से सबसे अधिक असर देश के किसानों को पड़ा। नोटबंदी के बाद सरकार द्वारा सहकारी बैंकों में पुरानी करेंसी न लेने का आदेश जारी करने के बाद न ही किसान सहकारी समितियों में जमा अपनी रकम को निकाल पाए और न ही लोन की अदायगी कर पाए, लेकिन अगर जल्द ही सहकारी समितियां ऑनलाइन हो गईं तो किसान एटीएम, मल्टीसिटी चेकबुक को अन्य बैंकों में इस्तेमाल कर कर्ज की रकम को समितियों में जमा कर सकते हैं।

खटीमा। रविवार के अवकाश के बाद खुले बैंकों में सुबह से ही रुपए निकालने वालों की लंबी कतारें लग गई। अधिकांश बैंकों में सोमवार को भी करेंसी का संकट बना रहा। एटीएम में भी रुपए न निकालने की वजह से लोगों को खासी परेेशानी का सामना करना पड़ा। शाखा प्रबंधक गरिमा मौर्य ने कहा कि उनके बैंक में करेंसी कोई समस्या नहीं है। एक सप्ताह में 24 हजार की लिमिट के अनुरूप भुगतान किया जा रहा है। एटीएम में प्रतिदिन पांच लाख रुपए डाले जा रहे हैं। यह रकम भारी भीड़ के चलते एक घंटे में समाप्त हो जाती है। 
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