किच्छा सीट से चुनावी समर में उतरे सूबे के मुखिया हरीश रावत के लिए इस सीट पर डगर आसान नजर नहीं आ रही है। भितरघात की जो तस्वीर उभरकर सामने आ रही है, उससे खुद सीएम के माथे पर भी चिंता की लकीरें नजर आने लगी हैं। किच्छा सीट से कांग्रेस के टिकट की दावेदारी करने वाले पार्टी के ही कई नेता बुधवार को नामांकन सभा में तो मौजूद रहे, लेकिन उनके समर्थकों की टीम सभा में नदारद थी।
किच्छा सीट कांग्रेस के लिए अब नाक का सवाल बन गई है। इस सीट पर सरकार के मुखिया सीएम हरीश रावत खुद चुनावी रण में कूदे हैं। वैसे तो इस सीट पर उन्हें चुनाव मैदान में उतारने के पीछे पार्टी की मंशा है कि इसका लाभ पार्टी को जिले की अन्य सीटों पर भी मिले। शुरूआती हालातों पर नजर डालें तो सीएम के लिए राह इतनी आसान नहीं है, जितनी समझी जा रही है। इस सीट पर महेंद्र चावला, सरवरयार खान, अजय तिवारी, संजीव सिंह, हरीश पनेरू, पुष्कर राज जैन, गणेश उपाध्याय, प्रेम लता सिंह, किन्नू शुक्ला सहित कई नेताओं ने टिकट के लिए दावेदारी की थी।
बुधवार को सीएम के नामांकन के बाद सभा का नजारा था वह साफ बयां कर रहा था कि सीएम के चुनाव लड़ने को लेकर वह जोश नहीं है जो होना चाहिए था। पिछले दिनों से टिकट के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाकर थक चुके पार्टी के ही कई नेता सीएम की सभा में तो पहुंचे लेकिन उनके साथ समर्थकों की भीड़ गायब थी। इससे एक बात साफ हो गई कि टिकट की आस लगाकर बैठे पार्टी के नेताओं की टीस अभी खत्म नहीं हुई। सीएम के सामने कोई खुलकर विरोध की हिम्मत तो नहीं जुटा पा रहा लेकिन अंदरखाने पार्टी के ये नेता सीएम को किस उत्साह से चुनाव लड़ाएंगे, यह आने वाला समय बतायेगा। फिलहाल सीएम के लिए इस सीट पर राह आसान नजर नहीं आ रही है।
। गदरपुर से कांग्रेस का टिकट कटने के बाद सीएम के सामने किच्छा से निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकीं शिल्पी अरोरा भी सीएम के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं। बता दें शिल्पी अरोरा गदरपुर सीट से 2012 के चुनाव में भी टिकट की दावेदार थीं, तब उन्हें किसी तरह मना लिया गया था। इस बार भी उन्होंने टिकट के लिए पूरा जोर लगाया था, लेकिन अंतत: उनकी जगह राजेंद्र पाल सिंह राजू को गदरपुर सीट पर उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। इससे खिन्न शिल्पी अरोरा बुधवार को देहरादून में पार्टी छोड़ने के साथ ही किच्छा में सीएम के सामने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर चुकी हैं। सीएम रावत पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाने के साथ ही शिल्पी उनके खिलाफ खुलकर बोलने की तैयारी कर चुकी हैं। शिल्पी अरोरा की मानें तो वह किच्छा क्षेत्र में ही जन्मी हैं और न्याय के लिए अपनी फरियाद लेकर जनता के बीच जाएंगी। कुल मिलाकर अगर किच्छा से शिल्पी निर्दलीय मैदान में उतरती है तो सीएम को एक और मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।