दुपहिया वाहन चालकों को सड़क दुर्घटनाओं से बचाने के लिए हाईकोर्ट द्वारा जारी किये गये हेलमेट पहनने के आदेश का पालन जिला प्रशासन भी नहीं करवा पा रहा है। कलक्ट्रेट परिसर और एसएसपी कार्यालय में वाहन चालक बिना हेलमेट के आ जा रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन बेखबर है। इसके साथ ही पेट्रोल पंपों पर भी ‘नो हेलमेट नो पेट्रोल’ का नियम लागू नहीं हो रहा है।
कुछ समय पहले हाईकोर्ट ने आदेश पारित कर दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनना आवश्यक कर दिया था। जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने भी दुपहिया वाहन चालकों को बिना हेलमेट के कलेक्ट्रेट परिसर में आने पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन एक माह बाद ही इस आदेश ने दम तोड़ दिया।
एसएसपी कार्यालय में इस नियम का पालन पूरी तरह नहीं हो सका, यहां आम आदमी तो दूर खुद पुलिस के अधिकारी और सिपाही हेलमेट नहीं पहनते हैं। पेट्रोल पंप संचालक भी ‘नो हेलमेट नो पेट्रोल’ के आदेश को नहीं मान रहे हैं।
गाड़ी शोरुम से, हेलमेट फुटपाथ से
शहर में हेलमेट पहनकर दुपहिया वाहन चलाने वाले दस प्रतिशत लोगों में अधिकांश लोकल हेलमेट का इस्तेमाल करते हैं। शोरुम से महंगी गाड़ियां खरीदने के बाद कुछ रुपये बचाने के लिए ये लोग फुटपाथ पर लगे लोकल हेलमेट ले लेते हैं। हेलमेट लेने के पीछे इनका कारण खुद की सुरक्षा नहीं बल्कि पुलिस की कार्यवाही से बचना होता है। यही विकल्प उनके लिए जानलेवा साबित होता है।
बाजार में बिक रहे चार तरह के हेलमेट
बाजार में अभी चार तरह के हेलमेट उपलब्ध हैं। जिनमें से एक है फुलफेस हेलमेट जो सिर के साथ पूरे चेहरे को कवर करता है और सबसे सुरक्षित माना गया है। दूसरा है हाफ हेलमेट जो सिर्फ सिर के ऊपरी हिस्से को ढकता है आम तौर पर महिलाएं इस हेलमेट का इस्तेमाल करती हैं। तीसरा है हाफ फेस हेलमेट जो सिर को कवर करता है पर चेहरे की सुरक्षा इससे नहीं होती। चौथा है हिटलर हेलमेट जिसे खासतौर पर युवा फैशन के लिए पहनते हैं।