डिस्ट्रिक्ट कोआपरेटिव बैंक के कैशियर द्वारा बचत खाते से गबन रकम को वापस करने में आनाकानी करने पर व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने बैंक में जमकर हंगामा काटा। मामले की जांच करने पहुंचे डीजीएम स्तर के दो अधिकारियों ने रकम वापसी का आश्वासन देकर व्यापारियों को शांत किया।
डिस्ट्रिक्ट कोआपरेटिव बैंक के खाताधारकों के बैंक एकाउंट में हेराफरी का खेल पिछले तीन सालों से चल रहा है। यहां तैनात कैशियर ने करीब 48 खाताधारकों के एकाउंट से लगभग 60 लाख की रकम का गबन किया है। कैशियर लोगों द्वारा जमा की गई रकम को लेकर रसीद देकर पासबुक में मैनुअली इंट्री करता था। परंतु, बैंक लेजर में इसकी इंट्री नहीं थी। मामले का पर्दाफाश होता देख कैशियर गत 18 मार्च से बैंक से फरार चल रहा है। 21 मार्च को खाताधारकों केे खातों की जांच होने पर उनके पांव तले से जमीन खिसक गई।
इस बीच बैंक के जीएम सीके कमल ने कैशियर को निलंबित कर डीजीएम रैंक के दो अधिकारी हरीराम व नरेश चंद को मामले की जांच सौंपी। कैशियर के हाथों 45 हजार की रकम गंवाने वाले व्यवसायी सतीश रस्तोगी के पास जमा रसीद न होने से जांच अधिकारियों ने उसे रकम लौटाने से हाथ खड़े कर दिए। जिस पर शुक्रवार को व्यापार मंडल अध्यक्ष राधाकृष्ण अग्रवाल व नगर पंचायत चेयरमैन सुकांत ब्रह्म की अगुवाई में व्यापारियों ने बैंक में हंगामा काटा।
तीखी बहस कते बाद अधिकारियों ने शनिवार को रकम लौटाने की बात कही। डीजीएम हरीराम व नरेश चंद ने बताया कि अब तक लोगों के करीब 15 लाख की रकम लौटाई जा चुकी है। जांच के बाद अन्य की रकम भी वापस होगी। वहां पर व्यापार मंडल महामंत्री दीपक बढ़ाल, पवित्र मंडल, संजीव गुप्ता, मुकेश गुप्ता, डीएन प्रकाश, आशू गर्ग, सूरज रस्तोगी, अजय रस्तोगी आदि थे।
एक और मामला आया सामने
घपले की जांच शुरू हुए करीब 20 दिन बीतने के बावजूद गबन की शिकायत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को भी निलंबित चल रहे कैशियर द्वारा एक और 78, 737 रुपये गबन का मामला सामने आया है। टैगोर नगर निवासी अशोक कुमार जोशी का अपनी पत्नी आशा जोशी के साथ ज्वाइंट अकाउंट है। शुक्रवार को बैंक पहुंचे अशोक के खाते में 1,43,073 रुपये की जगह मात्र 64,336 रुपये दर्शाए जाने पर उन्होंने जांच अधिकारियों से इसकी शिकायत की है।