काशीपुर। अमृत योजना के तहत शुद्ध पेयजल का दावा खोखला साबित हो रहा है। जगह-जगह पाइप लाइन लीकेज होने से घरों की टोटियों में शुद्ध पेयजल पहुंचने के बजाए दूषित पानी पहुंचने का खतरा मंडरा रहा है जबकि इंदौर (मध्य प्रदेश) में बीते दिनों दूषित पानी-पीने से कई लोगों की मौत होने के बावजूद भी जल संस्थान चेता नहीं है।
अमृत योजना के तहत बीते लगभग चार साल पहले शहर को आठ जोन में बांटकर जल निगम ने लगभग 62 करोड़ रुपये खर्च करके नई पाइप लाइन बिछाई थी। साथ ही सभी जोन में ओवर हेडटैंक बनाए गए थे। इसमें जोन एक में 3.69 करोड़ से, एक बी में 6.67 करोड़ से, जोन पांच में 16.18 करोड़ से, जोन तीन में 10.70 करोड़, जोन दो में 11.28 करोड़ से व जोन आठ में 12.68 करोड़ रुपये खर्च करके पाइप लाइन बिछाई गई है।
समय गुजरने और सड़क निर्माण और भारी वाहनों की आवाजाही से कई स्थानों पर पाइप लाइन लीकेज होने से पेयजल सप्लाई के दौरान अमृत योजना का पानी सड़कों पर बहता रहता है।
वहीं पेयजल सप्लाई बंद होने के बाद गड्ढों में जमा पानी लोगों के घरों और पाइप लाइन में पहुंच रहा है। सीतापुर आंखों के अस्पताल, पदमावती कॉलोनी के पास, पॉलीटेक्निक के पास पाइप लाइन लीकेज हुए काफी समय गुजर गया है लेकिन अभी तक लीकेज को बंद नहीं कराया गया है जबकि लीकेज के स्थान की सड़क और टाइल्स धंसने लगी है। जिम्मेदार विभागीय अधिकारी और कर्मचारी इस और कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इंदौर की घटना के बाद बीते दिनों ही जल संस्थान के मुख्यालय रामनगर से पत्राचार करके लीकेज पाइप लाइनों को जल्द से जल्द रिपेयर करने को कहा है। कई क्षेत्रों से लीकेज की शिकायत मिल रही हैं। क्षेत्र में जहां-जहां लीकेज पाइप लाइनें हैं उन्हें विभाग बंद करायागा।
- दीपक बाली, मेयर, काशीपुर