गदरपुर विधानसभा सीट पर हाथी की चाल ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। कल तक बसपा को मुकाबले से बाहर माना जा रहा था, लेकिन अब परिदृश्य बदला हुआ नजर आ रहा है। तीसरी बार चुनाव चुनाव लड़ रहे बसपा के राजेंद्र सिंह काली कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए चुनौती खड़ी कर रहे हैं। बसपा इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा दोनों के वोट बैंक पर सेंध लगाती नजर आ रही हैं। कांग्रेस प्रत्याशी को अंदरूनी मतभेदों के कारण हो रहे नुकसान के कारण मुकाबला अंतत: भाजपा और बसपा के बीच सिमट सकता है।
1, 20,898 मतदाताओं वाली गदरपुर विधानसभा में मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने ग्राउंड रिपोर्टिंग की। गदरपुर सीट में आने वाले दिनेशपुर से लेकर बाजपुर बार्डर तक 19 गांवों का सर्वे कर मतदताओं की टोह लेने की कोशिश की गई वहीं शहरी क्षेत्र में भी मतदाताओं के मन को टटोलने का प्रयास किया गया। बता दें गदरपुर सीट पर सर्वाधिक मतदाताओं की संख्या जट और राय सिख समाज की है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ग के वोटरों की संख्या 30 हजार है। वहीं दूसरे नंबर पर मुस्लिम वोटों की संख्या 22 हजार है। इसके बाद पंजाबी वोटर 20 हजार, बंगाली मतदाताओं की संख्या 18 हजार, पर्वतीय वोट 8000, पूर्वांचल समाज के 7500 एवं कंबोज समाज के वोटरों की संख्या 3000 है। शेष वोटरों में खत्री, बनिया और अन्य वर्ग है।
पूर्व में दो बार विधायक का चुनाव हार चुके बसपा के जरनैल सिंह काली को हर वर्ग का समर्थन मिलने से भाजपा और कांग्रेस के लिए चुनौती खड़ी होती नजर आ रही है। दरअसल सिख समाज से ताल्लुक रखने वाले जरनैल सिंह काली को उनके समाज का अच्छा समर्थन है, वहीं बंगाली और मुस्लिम वोटों पर भी वह सेंध लगाते नजर आ रहे हैं। बंगाली वोटों पर सेंध से जहां भाजपा को नुकसान है तो वहीं मुस्लिम वोटों पर सेंध का असर कांग्रेस पर पड़ सकता है। दूसरी तरफ मौजूदा विधायक अरविंद पांडे को पूर्वांचल समाज के साथ-साथ पर्वतीय समाज और बंगाली वोटों पर भी पकड़ मजबूत बनाये हुए हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बंगाली वोटों पर सेंधमारी की है। कांग्रेस के राजेंद्र पाल सिंह राजू को देर से टिकट फाइनल होने का नुकसान भी होता नजर आ रहा है। दूसरी तरफ पार्टी से नाराज चल रहे कई नेता उनके समर्थन में खुलकर प्रचार नहीं कर रहे हैं, जिससे उनके सामने दिक्कतें आ रही हैं।
प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि की बात करें तो जट राय सिख बाहुल्य कुछ गांवों में अरविंद पांडे से लोग काफी नाराज हैं उनका कहना है कि अरविंद पांडे गांवों में झांकने तक नहीं आये। दूसरी तरफ काली के लिए लोगों में सहानुभूति भी नजर आ रही। लोगों का कहा है कि काली जमीन से जुड़े नेता हैं, कांग्रेस पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं देकर दो बार उनके साथ धोखा किया है। काली दो बार चुनाव हार चुके हैं ऐसे में लोग उन्हें इस बार खुला समर्थन देते भी नजर आ रहे हैं यही वजह है कि कुछ दिन पूर्व तक जहां बसपा को मुकाबले से बाहर माना जा रहा था वहीं अब उन्हें कांग्रेस भाजपा दोनों के लिए चुनौती माना जा रहा है।
कांग्रेस प्रत्याशी राजेन्द्र पाल सिंह के प्रचार की यही स्थिति आने वाले कुछ दिन और रही तो कांग्रेस गदरपुर सीट पर मुकाबले से बाहर हो सकती है। दरअसल इस सीट कांग्रेस के अंदरूनी मतभेत पार्टी प्रत्याशी के लिए दिक्कतें खड़ी कर रहे हैं। टिकट कटने के बाद जहां इस सीट पर टिकट के दावेदार जरनैल सिंह काली बागी होकर बसपा से चुनाव मैदान में तो वहीं वही दूसरी ओर कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता शिल्पी अरोरा ने कहने को निर्दलीय प्रत्याशी से अपना नाम वापस तो ले लिया लेकिन प्रचार में वह दूर दूर तक नहीं दिखाई दे रही। यही हाल टिकट की मांग कर रही वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री रीना कपूर का भी है। वह भी पार्टी प्रत्याशी के लिए खुलकर कहीं प्रचार में नहीं दिखाई दे रही हैं। वहीं टिकट के दावेदार रहे पूर्व विधायक प्रेमानंद महाजन भी प्रचार से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। इसके अलावा मंडी समिति के चेयरमैन प्रीत ग्रोवर की उपस्थिति भी प्रचार में ना के बराबर ही है। यही नहीं कांग्रेस के किसी बड़े नेता भी अभी तक गदरपुर की ओर रूख नहीं किया है। सीएम हरीश रावत का पिछले दिनों प्रस्तावित रोड शो भी यहां अचानक कैंसिल हो गया था, जिससे कार्यकर्ता निराश भी हुए।
भाजपा प्रत्याशी अरविंद पांडे को पूर्वांचल, पर्वतीय और बंगाली वोटों से संजीवनी मिल सकती है। दरअसल वर्तमान में जो हालात गदरपुर सीट पर हैं, बसपा प्रत्याशी जरनैल सिंह काली ने अपनी मजबूती से पांडे को गदरपुर विधानसभा के चार बड़े बंगाली बाहुल्य ग्राम सभाओं आनंद खेड़ा, सुंदरपुर, मोतीपुर, दुर्गापुर और दिनेशपुर, गुलरभोज एवं इसके आस पास के क्षेत्रों से बंगाली वोटों का अच्छा समर्थन मिलता नजर आ रहा है, इन क्षेत्रों में बंगाली वोटों की संख्या करीब 18 हजार है। वहीं पर्वतीय समाज के वोट का रूझान भी अरविंद पांडे की ओर नजर आ रहा है। क्यों कि इस सीट पर दो सिख प्रतयाशियों के खड़े होने से पर्वतीय समाज का रूख भाजपा की ओर ही दिखाई दे रहा है।
गदरपुर सीट पर जहां बसपा के जरनैल सिंह काली अति उत्साहित नजर आये तो वहीं कांग्रेस के राजेंद्र पाल के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आयी। ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान बसपा के जरनैल सिंह काली केलाखेड़ा क्षेत्र में सिख बाहुल्य क्षेत्र में प्रचार करते हुए मिले। उन्होंने कहा इस बार जनता के प्यार और आशीर्वाद से उनकी सौ नहीं बल्कि दो सौ प्रतिशत तय है। उन्होंने उत्साह से लवरेज होकर कहा इस बार उनके पक्ष में एकतरफा माहौल है। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी राजेन्द्र पाल सिंह बाजपुर विधानसभा की सीमा से सटे शिवपुरी गांव में प्रचार करते समय चिंता में दिखे। उनसे जब अमर उजाला टीम ने बात की तो वह सवालों के संतोषजनक जवाब भी नहीं दे पाये। वहीं अरविंद पांडे केलाखेड़ा के पास एक गांव में सभा करते हुए मिले। इस दौरान अमर उजाला से बात करने पर पांडे ने स्वीकार किया कि उनका मुकाबला कांग्रेस से नहीं बल्कि बसपा से ही है। और वह भी अपने को मजबूत मानते हैं। पांडे ने कहा उनके विकास द्वारा कराये गये विकास कार्य जीत का आधार बनेंगे।