फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पानी का इलाज करने वाला सीईटीपी ही बीमार निकला

Fri, 14 Oct 2016 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो सितारगंज
विज्ञापन
सीईटीपी प्लांट के पाइप से ट्रीट होकर निकल रहा पानी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
फैक्ट्रियों के दूषित पानी का इलाज करने वाला सीईटीपी ही जांच में बीमार निकला। गाजियाबाद की सीमा लैब में सीईटीपी के पानी का सैंपल फेल हो गया। जांच में पानी दूषित मिला। पीसीबी ने कार्रवाई की संस्तुति कर रिपोर्ट देहरादून मुख्यालय को भेजी है। पीसीबी के क्षेत्रीय प्रबंधक ने बताया कि सिडकुल की सभी फैक्ट्रियां सीईटीपी को पानी दे रही हैं, जिसे वह प्रॉपर ट्रीट नहीं कर पा रहा है। डीएम चंद्रेश यादव ने कहा कि नहर, नालों और गड्ढों में जहरीला पानी आने से मवेशियों की मौत के मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। वे सिडकुल के आरएम से मामले की रिपोर्ट लेंगे और उसके बाद संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन



  सिडकुल की नहर, नालों में प्रवाहित हो रहे जहरीले पानी से क्षेत्र के सिसौना, कल्याणपुर, बरुआबाग, बमनपुरी के लोग प्रभावित हैं। बीते दिनों जहरीले पानी से छह मवेशियों की मौत हो गई थी और कई मवेशी बीमार पड़ गए। गत जुलाई-अगस्त में नहर में जहरीला पानी आने से ग्रामीणों में हाहाकार मचा था। आठ अगस्त को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के क्षेत्रीय प्रबंधक सोमपाल सिंह ने सिंचाई विभाग, एल्डिको सिडकुल के अधिकारियों के साथ अपर बैगुल नहर, नाले और कामन इंफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का निरीक्षण कर सैंपल लिए थे।
  बृहस्पतिवार को क्षेत्रीय प्रबंधक सोमपाल ने बताया कि सीईटीपी के दूषित पानी के सैंपल की रिपोर्ट आ गई है। गाजियाबाद की सीमा लैब में जांच कराई गई। इसमें सैंपल फेल हो गया। बताया कि सीईटीपी प्रॉपर न चलने के कारण पानी ट्रीट नहीं हो पा रहा है। सीईटीपी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर रिपोर्ट देहरादून के पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुख्यालय को भेज दी गई है।
विज्ञापन



फैक्ट्रियां दे रहीं मानक से अधिक विषैला पानी
सीईटीपी के इंजीनियर हिमांशु जोशी ने बताया कि सीईटीपी पूरी तरह सही है। गंदा पानी प्रॉपर ट्रीट हो रहा है। फैक्ट्रियों से मिलने वाला पानी मानक से अधिक विषैला है। इसे मानक के तहत ट्रीट किया जा रहा है। ट्रीट के बाद पानी तो शुद्ध है। लेकिन पानी में कलर आने की कमी है। इस कमी से पानी को कोई नुकसान नहीं है।



फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला पानी नहर, नालों में आने से मवेशियों की मौत के बाद ग्रामीण भयभीत हैं। इससे ग्रामीण सिडकुल से सटे जंगल में मवेशियों को चराने ले जाने से कतरा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जहरीले पानी से मवेशियों के मरने के साथ ही गांवों में संक्रामक रोग फैल रहे हैं। लेकिन, प्रशासन ने अभी तक प्रभावित गांवों की सुध नहीं ली।


  उकरौली, लक्ष्मीझाला, सिसौना व बरुआबाग आदि गांवों में जहरीले पानी से लोग भयभीत हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्रियां दूषित पानी को बिना ट्रीट किए नहर, नालों और गड्ढों में छोड़ रही हैं। इससे उनके मवेशी नहर का पानी पीकर बीमार हो रहे हैं। एक साल से नासूर बनी जहरीले पानी की समस्या का अभी तक निस्तारण नहीं हो पाया है। इससे गांवों में करीब दो दर्जन मवेशी अब तक मर चुके हैं।
  कहा कि जहरीले पानी की रोकथाम नहीं होने के कारण वह अपने मवेशियों को चराने के लिए जंगल ले जाने से कतराने लगे हैं। इसके अलावा गांवों के नलों का पानी भी दूषित होता जा रहा है। कहा कि ग्रामीणों द्वारा जहरीले पानी का विरोध करने के बावजूद प्रशासन ने अभी तक कोई सुध नहीं ली। प्रशासनिक अधिकारी ऐसे गांवों का मुआयना तक नहीं कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। उन्होंने जिलाधिकारी चंद्रेश यादव से मामले में कार्रवाई की मांग की है।


पशु चिकित्साधिकारी की रिपोर्ट में मृत मवेशियों की मौत के सही कारण तो सामने नहीं आए हैं। लेकिन, जहरीले पदार्थ के सिंटम जरूर मिले हैं। पशु चिकित्साधिकारी डा. जितेंद्र कुमार ने बताया कि बीते दिन लक्ष्मीझाला के रामायण प्रसाद के बीमार मवेशी की मौत प्रथमदृष्टया जहरीले पदार्थ से होना प्रतीत हुआ है। बताया कि पोस्टमार्टम में जहरीले पदार्थ के सिंटम मिले हैं। जहरीले पानी से मौत होने की पुष्टि न होने के कारण विसरा सुरक्षित रख सिडकुल पुलिस चौकी के सुपुर्द किया है। बताया कि लक्ष्मीझाला गांव के गोमती प्रसाद की बीमार भैंस, रामायण प्रसाद की दो अन्य बीमार भैंसों की हालत में अब सुधार है।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें