जिला मुख्यालय रुद्रपुर के रोडवेज डिपो की स्थिति दयनीय हो गई है। रोडवेज का एआरएम आफिस भवन अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। चारों ओर से भवन का प्लास्टर भी झड़ चुका है, खिड़कियां जंग खा चुकी हैं।
इसी भवन में कैश रूम, टाइम आफिस, टिकट रूम सहित क्षेत्र के डिपो के भी पूरी दस्तावेज अपडेट होते हैं। अब हालत यह है कि इस डिपो में कर्मचारियों को वेतन भी समय पर नहीं मिल पा रहा है।
वर्कशाप में बसों की मरम्मत के लिए भी फंड न होने के कारण डिपो की सभी बसों का संचालन करना डिपो प्रबंधन के लिए चुनौती बन गया है।
घिसे टायरों को 16 हजार किमी से अधिक खींचना डिपो के चालकों की मजबूरी हो गई है। ऐसे में यदि कोई बड़ा हादसा हो जाए तो इसके लिए किसे जिम्मेदार समझा जाए।
देहरादून निदेशालय तो राजधानी की चकाचौंध में अपने पर्वतीय क्षेत्रों के डिपो की हालत ही शायद भूल चुका है। रही बात राज्य के महत्वपूर्ण जिला ऊधमसिंह नगर की तो यहां के हालत मुख्यालय के भवन से ही लगाई जा सकती है। जगह-जगह से टूट चुकी डिपो की बिल्डिंग कब धराशायी हो जाए, कहा नहीं जा सकता है।
डिपो प्रबंधन का कहना है कि भवन की मरम्मत के लिए एक लाख 17 हजार रुपये का बजट प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय को भेजा गया है, प्रस्ताव भेजे भी करीब तीन महीने से अधिक का समय हो चुका है।
लेकिन बजट के अभाव में प्रस्ताव भी कहीं फाइलों में ही गुम हो गया है। डिपो में बसों की मरम्मत के लिए भी धनराशि ही आड़े आ रही है।
बता दें कि रुद्रपुर रोडवेज डिपो से पर्वतीय क्षेत्रों सहित बाहरी प्रदेशों और राजधानी दिल्ली के लिए बसों का संचालन होता है।
सिडकुल की स्थापना के बाद से इस डिपो पर सवारियों का भार भी पड़ा है, लेकिन विभाग मरम्मत कार्यों के लिए बजट क्यों उपलब्ध नहीं करा रहा है, इस बात से डिपो के कर्मचारी भी हैरान हैं।