संदिग्ध परिस्थितियों में हुई जनजाति के किसान राजकिशोर राणा की मौत का राज खोलने के लिए अब पुलिस मृतक के शरीर के अंदर मिली मिट्टी का सहारा ले रही है। पुलिस ने मृतक के शरीर के अंदर की मिट्टी के सैंपल लेकर उसे जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिया है। पुलिस के अनुसार 15 दिन में इसकी जांच रिपोर्ट आ जाएगी।
उल्लेखनीय है पांच अक्तूबर को घर से लापता हुए राजकिशोर राणा का शव 12 अक्तूबर को गांव के नजदीक बहने वाले बरसाती नाले से बरामद हुई। अभी तक पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है। लेकिन मृतक के परिजन और ग्रामीण इसे आत्महत्या मानने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि राजकिशोर राणा की हत्या की गई है। हत्यारों ने इसे आत्महत्या में बदलने का प्रयास किया गया है। उन्होंने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाया। आरोप लगाया कि मृतक के भाई भीकम सिंह ने पुलिस को तहरीर देकर दो लोगों पर हत्या करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ 306 और एससी-एसटी एक्ट मुकदमा दर्ज किया।
ग्रामीणों की तरफ से पुलिस की कार्यशैली पर उठाए जा रहे सवालों पर एएसपी पंकज भट्ट का कहना है कि मृतक के पोस्टमार्टम के लिए दो चिकित्सकों का पैनल बैठाया गया था। मृतक के शरीर पर कोई भी निशान धारदार हथियार से हत्या का नहीं मिला है। जो अंग क्षतिग्रस्त बताए जा रहे हैं वह पानी में पाए जाने वाले जीवाणुओं के द्वारा खाए प्रतीत होते हैं। मौत का राज खोलने के लिए मृतक के शरीर के अंदर जो मिट्टी मिली है उसके सैंपल जांच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजा गया है। उस मिट्टी से पता चलेगा कि राजकिशोर की मौत कहां पर हुई है। मौके की मिट्टी के नमूने भी लिए गए हैं। यह रिपोर्ट 15 दिन के अंदर आ जाएगी। विसरा रिपोर्ट आने में 45 दिन का समय लगेगा। मृतक की हत्या का मामला प्रकाश में आया तो दोनों आरोपियों के विरुद्घ 302 का मुकदमा पंजीकृत किया जाएगा।